Exclusieve: राफेल डील भारत और फ्रांस दोनों के लिए फायदे का सौदा- इमैनुएल मैक्रों

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों शुक्रवार से चार दिनों की भारत यात्रा पर आ रहे हैं. मैक्रों की यह पहली भारत यात्रा है. भारत आने से पहले इंडिया टुडे ने उनसे खास बातचीत की. उस बातचीत के ये हैं संपादित अंश.

राज चेंगप्पा: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आप की उम्र में 27 सालों का बड़ा अंतर है. ऐसे में आप दोनों में कैसी केमिस्ट्री रहेगी?

इमैनुएल मैक्रों: मैं पीएम मोदी के विजन से बेहद प्रभावित हूं, खासतौर से जलवायु परिवर्तन पर उनकी प्रतिबद्धता से. हम दोनों पर्यावरण को लेकर भारत में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन समेत कई काम करेंगे, जो पर्यावरण सुधारने में सहायक होंगे. जहां तक पीएम मोदी के साथ केमिस्ट्री की बात है तो वे बहुत बुद्धिमान व्यक्ति हैं. स्वतंत्र विचारों वाला उनका अपना नजरिया होता है जिससे लोग स्वयं उनकी ओर खिंचे चले आते हैं. इसके अलावा जितना अपने देश की संप्रभुता के लिए वे सोचते है, उतना ही मैं भी अपने देश की अखंडता के लिए फ्रिक्रमंद रहता हूं.

राज चेंगप्पा: आप और पीएम मोदी दोनों ही अपने सामरिक रिश्तों को लेकर बहुत सजग हैं. ऐसे में जब आप नई दिल्ली में लैंड करेंगे तो आप अपनी इस यात्रा को किस लिहाज से याद करना चाहेंगे?

इमैनुएल मैक्रों: मेरे लिए भारत एक बहुत ही विश्वसनीय साझेदार है. हिंद महासागर और प्रशांत महासागर में स्थिरता बनाए रखने के लिए हमारी दोस्ती बेहद अहम है. हम दोनों ही अपनी संप्रुभता को बनाए रखने के लिए सजग हैं. जब हम अपनी सुरक्षा और द्विपक्षीय एजेंडे के बारे में बात करते हैं तो आतंकवाद का जिक्र करना जरूरी हो जाता है, क्योंकि हम दोनों ही देशों ने आतंकवाद का दंश अलग-अलग तरीके से झेला है, खासतौर से सीमापार आतंकवाद को. ऐसे में ये बेहद जरूरी हो जाता है कि हम दोनों ही अपने देश के लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी खुफिया सूचना और बेहतर करने के साथ-साथ उसे साझा करें.

राज चेंगप्पा: मुझे खुशी है कि आपने आतंकवाद का जिक्र किया, क्योंकि यह दोनों ही देशों के लिए बेहद चिंता का विषय है. ऐसे में दोनों देश सामूहिक रूप से कौन से कदम उठा सकते हैं, खास तौर से पाकिस्तान जैसे देशों के लिए जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं?

इमैनुएल मैक्रों: आतंकवाद के खिलाफ हमें द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ सूचनाओं को साझा करने की जरूरत है. आपके लिए इराक-सीरिया से खदेड़े गए जेहादियों का खतरा है. हम दोनों को इससे बचने के लिए मिलकर सहयोग करना होगा. उन्होंने कई बार फ्रांस पर हमला किया. अब वे फिर से वापसी करने की कोशिश करेंगे. वे अब आपके इलाके में भी शरण ले सकते हैं. इनके खात्मे के लिए हमें बेहद कड़ाई से कदम उठाने होंगे. इसके लिए हमें खुफिया सूचनाओं का और प्रभावी तरीके से आदान-प्रदान करना होगा.

राज चेंगप्पा: राफेल डील को लेकर भारत में हंगामा मचा हुआ है. विपक्षी दल कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा सरकार ने इस डील के लिए ज्यादा पैसे दिए, जबकि उनके कार्यकाल में ज्यादा बेहतर डील हुई थी. इसके पीछे क्या सच्चाई है?

इमैनुएल मैक्रों: ये डील मेरे कार्यकाल में नहीं हुई थी, लेकिन मैं ये कहना चाहूंगा कि ये डील हम दोनों के लिए ही फायदेमंद रही है. राफेल के कई कलपुर्जे अब भारत में ही बनेंगे. ऐसे में ये यहां की इंडस्ट्री और यहां के कामगारों के लिए बेहतर है. जहां तक सुरक्षा की बात है तो ये अपनी श्रेणी में बेहद उन्नत है. मौजूदा वक्त में इसका कोई मुकाबला नहीं है. फ्रांस के लिहाज से देखें तो ये सौदा हमारे लिए इसलिए खास है क्योंकि भारत में संभावनाएं बहुत हैं. यह हमारे साझा समझौतों का एक हिस्सा है.

राज चेंगप्पा: इस डील का पूरा ब्यौरा क्यों नहीं बता दिया जा रहा, ताकि सारे विवाद पर लगाम लगाई जा सके?

इमैनुएल मैक्रों: दोनों देशों के बीच जब किसी मामले पर बेहद सेंसिटिव बिजनेस इंटरेस्ट शामिल रहते हैं तो खुलासे करना उचित नहीं रहता. इस डील में कॉमर्शियल एग्रीमेंट के तहत प्रतियोगी कंपनियों को डील की बारीकियों की जानकारी नहीं होनी चाहिए. यह कमर्शियल एग्रीमेंट कुछ कंपनियों के हितों से जुड़े हैं लिहाजा इन पर गोपनीयता जायज है. डील की किन बातों को विपक्षी दल और संसद में लाना है, ये वहां की सरकार को तय करना चाहिए.

राज चेंगप्पा: वन बेल्ट वन रोड पर भारत की कई आपत्तियां हैं. क्या आपको लगता है कि चीन को इन पर जवाब देकर भारत की चिंताओं को दूर कर देना चाहिए?

इमैनुएल मैक्रों: यदि वन बेल्ट वन रोड को सफल होना है तो इसे उन सभी देशों के हितों का ध्यान रखना होगा, जहां से इसे गुजरना है. इसे हमारी वैश्विक प्रतिबद्धताओं के अनुरूप होना चाहिए. भारत के नजरिए से मैं समझ सकता हूं कि कैसे यह खतरनाक हो सकता है. इसका सबसे अच्छा जवाब होगा कुछ अलग प्रस्ताव. हमें अफ्रीका तक पूरे क्षेत्र का विकास करना होगा. हमें और अधिक व्यापार, आर्थिक एकीकरण के साथ-साथ अपने लोगों को शिक्षित करना होगा. हम इसका हिस्सा हो सकते हैं, क्योंकि यह अच्छे काम के लिए है. लेकिन इसमें हमारी भूमिका क्या होगी, यह देखने वाली बात है. अगर इस योजना से सिर्फ एक देश का लाभ होगा, तो यह सफल नहीं हो सकती.

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