दो खतरनाक दुश्मन बनेंगे दोस्त? मई में हो सकती है किम जोंग उन और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात

वॉशिंगटन: साउथ कोरियाई अधिकारियों के हवाले से न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नॉर्थ कोरिया के शासक किम जोंग उन से मुलाकात कर सकते हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि दोनों नेताओं की मुलाकात मई महीने में हो सकती है. इस खबर की पुष्टि साउथ कोरिया के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर ने की है. साउथ कोरिया के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर ने कहा कि बातचीत की दिशा में प्योंगयांग से व्हाइट हाउस को चिट्ठी लिखी गई थी, जिसे मंजूर कर लिया गया है. डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग की मुलाकात को लेकर व्हाइट हाउस की पहली शर्त थी कि नॉर्थ कोरिया अपने मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाए जिसे किम जोंग उन ने स्वीकार कर लिया है.

ऐतिहासिक होगी यह मुलाकात
डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन की मुलाकात ऐतिहासिक होगी. बता दें कि 5 मार्च को साउथ कोरिया का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल नॉर्थ कोरिया पहुंचा था. साउथ कोरियाई प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात किम जोंग उन से हुई थी. इस मुलाकात के दौरान साउथ कोरिया की तरफ से इस बात को लेकर भरपूर कोशिश की गई कि नॉर्थ कोरिया अमेरिका से बातचीत की दिशा में आगे बढ़े. उस मुलाकात के बाद किम जोंग ने साउथ कोरिया के राष्ट्रपति को मुलाकात और बातचीत करने के लिए उन्हें प्योंगयांग आमंत्रित किया था.

उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए प्रतिबद्ध है अमेरिका – ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 मार्च को कहा था कि अमेरिका और उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगी कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरणके लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. ट्रंप ने व्हाइट हाउस में स्वीडिश प्रधानमंत्री के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा था, ‘‘हम कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर प्रतिबद्ध हैं.’’

उत्तर कोरिया की अमेरिका के साथ बातचीत करने की इच्छा जाहिर करने संबंधी समाचारों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा था, ‘‘आज उस पर कई खबरें हैं.’’ उन्होंने कहा था, ‘‘उम्मीद करते हैं किये सभी सकारात्मक हों. उम्मीद करते हैं कि इसके सकारात्मक परिणाम होंगे.’’ उत्तर कोरिया के इस बार ईमानदार होने के सवाल पर ट्रंप ने यह प्रतिक्रिया दी. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था, ‘‘मुझे लगता है कि वे ईमानदार हैं, लेकिन मुझे लगता है कि यह लगाए प्रतिबंधों के कारण भी है.’’

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