यमुना एक्सप्रेस वे यानी ‘हादसों का हाईवे’, 7 साल में सड़क हादसों में हुईं 705 मौतें

नई दिल्ली : दिल्‍ली और आगरा को जोड़ने वाले यमुना एक्‍सप्रेस वे को ‘हादसों का हाईवे’ कहना गलत नहीं होगा. इस हाईवे पर वाहन तेज रफ्तार से भर्राटा भरते हैं. इसके चलते कई सड़क हादसे होते हैं. अगर यमुना एक्‍सप्रेस वे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां हादसे होने की तस्‍वीर भयावह है. 2012 से 2018 तक इस हादसों के हाईवे पर हुए हादसों में 705 लोगों की मौत हो चुकी है. 2012 में शुरू हुए यमुना एक्‍सप्रेस में अब तक 2065 लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं. रोजाना इस पर से गुजरने वाले लोगों में से पांच लोग या तो मौत का शिकार होते है या फिर अस्‍पताल पहुंचते हैं.

भयावह हैं आंकड़े
YEIDA के आंकड़ों के मुताबिक यमुना एक्‍सप्रेस वे पर 2012 से 2018 के बीच 4,900 सड़क हादसे हुए. इन सड़क हादसों में 8,205 लोग प्रभावित हुए, जिनमें से 7,500 लोग घायल हुए और 705 लोगों ने अपनी जान गंवाई. वहीं अगर आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2012 से लेकर 2017 के बीच यमुना एक्‍सप्रेस वे पर 2.3 करोड़ ओवर स्‍पीड वाले वाहनों की पहचान हुई. लेकिन इनमें से महज 18 हजार वाहनों का चालान ही काटा गया.

हादसों का प्रमुख कारण तेज रफ्तार
YEIDA के सीईओ अरुण वीर सिंह के मुताबिक यमुना एक्‍सप्रेस वे पर लगातार हो रहे सड़क हादसों की प्रमुख वजह तेज रफ्तार वाहन चलाना है. उनके अनुसार यमुना एक्‍सप्रेस वे पर हादसों का शिकार हुए वाहनों की पड़ताल में हादसे के वक्‍त उनके तेज रफ्तार में होने के सुबूत मिले हैं. सभी वाहनों के स्‍पीडोमीटर की सुइयां 160 से 180 किमी/घंटा पर अटकी मिलीं. साथ ही अरुण ने बताया कि हाईवे पर रात के समय सर्वाधिक सड़क हादसे हुए. रात एक बजे से तीन बजे के बीच तक करीब 82% सड़क हादसे दर्ज किए गए.

नियमों का धड़ल्‍ले से हो रहा उल्‍लंघन
यमुना एक्‍सप्रेस वे पर सभी वाहनों के लिए स्‍पीड लिमिट भी तय है. लेकिन अधिकांश वाहन चालक इनका उल्‍लंघन ही करते हैं. यमुना एक्‍सप्रेस वे पर कार के लिए स्‍पीड लिमिट 100 किमी/घंटा और भारी वाहनों के लिए स्‍पीड लिमिट 60 तय है. गौतम बुद्ध नगर के एसपी ट्रैफिक अनिल कुमार झा के अनुसार वाहन 100 किमी/घंटा की स्‍पीड से ऊपर पहंचने पर स्‍वत: अनियंत्रित होना शुरू हो जाता है. वहीं यमुना एक्‍सप्रेस वे पर लोगों को गति सीमा के प्रति सचेत करने और जानकारी देने के लिए जगह-जगह संकेतक लगे हैं. वाहन चालक उनको नजरअंदाज करते हैं और वाहन को तेज रफ्तार में दौड़ाते हैं.
यह भी पढ़ें : राहुल गांधी के नोटबंदी वाले बयान पर उखड़े योगी, कहा- उन्हें फाड़ने की आदत है

नींद भी है कारण
यमुना एक्‍सप्रेस वे का निर्माण करने वाली कंपनी जेपी इंफ्राटेक के एजीएम (ऑपरेशन) संतोष पवार ने सड़क हादसों के कुछ कारण गिनाए. पहला तो स्‍पीड लिमिट से अधिक रफ्तार में वाहन चलाना है. अधिकांश वाहन चालक ऐसा ही करते हैं. उनके मुताबिक दूसरा कारण चालक की नींद लग जाना भी है. संतोष का कहना है कि अगर लोग पेट भर खाना खाने के बाद यमुना एक्‍सप्रेस वे पर वाहन चलाते हैं तो उन्‍हें रास्‍ते में नींद लग जाना आम बात है. इससे वाहन अनियंत्रित होते हैं और सड़क हादसे का शिकार बनते हैं.

इंतजाम दुरुस्‍त होने का दावा
अथॉरिटी ने दावा किया है कि यमुना एक्‍सप्रेस वे पर लोगों को जागरूक करने के लिए एलईडी स्‍क्रीन भी लगाई गई हैं. इनमें लोगों को जागरूक करने के लिए संदेश चलते हैं. मेटल बैरियर लगे हैं. वाहनों पर नजर रखने के लिए 55 कैमरे और 19 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. साथ ही कंट्रोल रूम में लगी स्‍क्रीनों पर उनकी निगरानी होती है. उनके मुताबिक आपातकालीन स्थिति में टोल फ्री नंबर के जरिये सेवाएं मुहैया कराई जाती हैं. Highway Sathi नामक App के जरिये रिकवरी वैन, एंबुलेंस और रिपेयर वाहन भेजे जाते हैं.

कंक्रीट रोड और टायर
माना जाता है कि एयर प्रेशर अधिक होने से सीमेंट रोड पर वाहन चलाने से टायर गर्म होकर फट जाते हैं. अरुण के मुताबिक ऐसा सिर्फ पुराने टायरों और तेज रफ्तार वाहनों में होता है. सामान्‍य रूप से ऐसा होना संभव नहीं. ऑटो एक्‍सपर्ट रनोजॉय मुखर्जी के अनुसार कंक्रीट की सड़क पर वाहन चलाते समय टायरों की फिटनेस हमेशा अच्‍छी रखें. अलग से रबड़ चढ़े टायर जल्‍दी फटते हैं. टायरों में नाइट्रोजन भरकर टायरों को फटने से रोका जा सकता है. लेकिन यह उपाय सौ फीसद कारगर नहीं होता.

सस्‍ती गाडि़यां अधिक जानलेवा, चालान काटने में समस्‍या
सस्‍ते वाहन अधिक खतरनाक साबित होते हैं. रनोजॉय मुखर्जी के मुताबिक सस्‍ते वाहनों में लगे टायरों की गुणवत्‍ता कम होती है. वहीं महंगी गाडि़यों में अच्‍छी रेटिंग वाले टायर लगाए जाते हैं, जिनकी क्षमता और जीवन अधिक होता है. ट्रैफिक पुलिस के अनुसार तेज रफ्तार वाहनों को दूसरे वाहन से पीछा करके पकड़ पाना मुमकिन नहीं है. ऐसे में कैमरों से उनका नंबर ट्रैक करके चालान काटा जाता है. अब ऐसी योजना पर भी विचार हो रहा है कि अगर किसी व्‍यक्ति का चालान तीन बार से अधिक कटता है तो उसे ड्राइविंग लाइसेंस तीन साल के लिए निलंबित कर दिया जाए. साथ ही नियमों के उल्‍लंघन पर चालान बनाकर टोल पर उससे वसूला जाए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Type in
Details available only for Indian languages
Settings
Help
Indian language typing help
View Detailed Help