कानून लागू होने से पहले ‘आधार’ डेटा संग्रहण करना अवैध, सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की दलील

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट से बुधवार (14 मार्च) को कहा गया कि UIDAI द्वारा 2010 से 2016 में आधार से जुड़ा कानून लागू होने तक नागरिकों की बायोमैट्रिक जानकारियां एकत्र करना ‘अवैध’ और ‘गैरकानूनी’ है और एकत्र किया गया डेटा नष्ट किये जाने लायक है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ के सामने कानून की कमी के कारण 2009-2016 के दौरान एकत्रित डेटा को गैरकानूनी बताने वाली दलीलें दी गईं.

यह पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जिसमें केन्द्र की महत्वाकांक्षी आधार योजना और इससे जुड़े 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है. इनमें से एक याचिका उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के एस पुत्तास्वामी ने दायर की है. सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के वी विश्वनाथन ने कहा कि छह वर्ष तक आधार कानून को लागू करने में सरकार की नाकामी का मतलब यह हुआ कि 2010-2016 के बीच किये गये सभी नामांकन बिना किसी जानकारी के ली गई रजामंदी वाले हैं.

इसके बाद पीठ ने वकील से पूछा कि कानून लागू होने से पहले एकत्रित डेटा के साथ क्या होगा, इस पर विश्वनाथन ने जवाब दिया कि डेटा को नष्ट किया जाना चाहिए.

अदालत ने आधार योजना का विरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं के अन्य वकीलों से कल तक दलीलें पूरी करने तथा केन्द्र की ओर से पेश अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल से 20 मार्च से अपनी दलीलें शुरू करने को कहा.

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