सुरक्षा के लिए खतरा हैं रोहिंग्या, उन्हें वापस भेजा जाए : RSS

जम्मू: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने म्यांमार और बांग्लादेश के अवैध प्रवासियों को वापस भेजने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर में उनकी मौजूदगी देश की सुरक्षा के लिए खतरा है. आरएसएस के प्रांत संघचालक ब्रिगेडियर( सेवानिवृत्त) सुचेत सिंह ने कहा, ‘हम उन्हें शरणार्थी नहीं मानते क्योंकि वे विदेशी हैं और हमारे देश में अवैध तरीके से घुसे.’ प्रांत कार्यवाह पुरुषोत्तम दधीचि के साथ सिंह ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकारों को अवैध तौर पर बसे विदेशियों की पहचान करनी चाहिए और उन्हें वापस भेजना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘हमें उन्हें क्यों बर्दाश्त करना चाहिए जब वे देश के साथ ही राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा हैं.’

पुरानी सरकारों पर साधा निशाना
जम्मू में उन्हें बसने की अनुमति देने के लिए केंद्र में पूर्व की यूपीए सरकार और राज्य में पूर्ववर्ती नेशनल कांफ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, ‘वे मौजूदा स्थिति( जम्मू में रोहिंग्या और बांग्लादेशी को वापस भेजे जाने पर प्रदर्शन) के लिए पूरी तरह जिम्मेदार हैं.’ पूर्व सैन्य अधिकारी ने कहा, ‘जम्मू में उन्हें बसाने के पीछे क्या इरादा था, यह उन सबको पता है…हम उन्हें सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं और चाहते हैं कि जल्द उन्हें भेजा जाए.’’ दधीचि ने कहा कि राज्य में करीब 300 शाखा हैं और हम कश्मीर घाटी में भी शाखा संचालन के दिन का इंतजार कर रहे हैं .

कश्मीर में शक्ति और युक्ति की जरूरत: मोहन भागवत
इससे पहले गुरुवार (15 मार्च) को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के ‘लोगों को बांटने की कोशिश करने वाली ताकतों’ से निपटने के लिए शक्ति और युक्ति के इस्तेमाल का आह्वान करते हुए कहा था कि परेशानी पैदा करने वाले ताकत की ही भाषा समझते हैं. उन्होंने कहा कि‘‘ सत्य की जीत’’ सुनिश्चित करने के लिए शक्ति और युक्ति की जरूरत है.

भागवत ने कहा कि भारतीय सेना ने अपने‘‘ प्रयासों, बलिदानों एवं समर्पण के साथ’’ शक्ति बनाए रखी है. इसकी इसलिए जरूरत है क्योंकि परेशानी पैदा करने वाले‘‘ केवल ताकत की भाषा समझते हैं.’’ उन्होंने कश्मीर के भारत के अभिन्न हिस्सा होने की बात पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप एक राष्ट्र का है और उसका डीएनए एक ही है. भागवत ने कहा, ‘‘ कश्मीर समस्या को समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. समस्या की जड़ यह है कि हम अपनी एकता भूल गए हैं और यह भूल गए हैं कि भारत एक( देश) है.’’ वह जम्मू- कश्मीर स्टडी सेंटर द्वारा आयोजित सप्त- सिंधु जम्मू कश्मीर लद्दाख महोत्सव के उद्घाटन के मौके पर बोल रहे थे.

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