ऐतराज के बावजूद CBI ने लालू पर दर्ज किया FIR, रेलवे अधिकारी का नाम शामिल न होने पर अब भी सवाल

नई दिल्ली: पिछले साल, सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा ने अपने ही लीगल विंग, अभियोजन निदेशालय के फैसले को रद्द करते हुए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के लिए दबाव डाला था, जिसमें दावा किया गया कि 2006 में बतौर रेल मंत्री लालू प्रसाद ने पटना में जमीन के लिए रेलवे के दो होटलों को एक निजी कंपनी को सौंप दिया. लेकिन अभियोजन निदेशालय ने जब गैर-कानूनी तरीके से किए गए होटल के ट्रांसफर में शामिल कथित साजिशकर्ताओं की लिस्ट तैयार की तो उन्होंने आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दिए आईआरसीटीसी के दो में से एक अधिकारी का नाम उसमें शामिल नहीं किया.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के मुताबिक, जिस अधिकारी का नाम उस लिस्ट में शामिल नहीं था वो उस दौरान आईआरसीटीसी निदेशक (पर्यटन), राकेश सक्सेना थे और इसके पीछे कोई भी वजह नहीं बताई गई कि आखिर क्यों उनका नाम लिस्ट में नहीं है. हालांकि कई सीबीआई अधिकारियों ने इस चूक की ओर ध्यान दिलाया, लिस्ट में शामिल आरोपियों के ऑफिस और घर की तलाशी के बाद राकेश सक्सेना के नाम के बगैर 7 जुलाई 2017 को प्राथमिकी दर्ज की गई.

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