भारत द्वारा जायरीनों को वीजा जारी नहीं करने पर पाकिस्तान ने जतायी निराशा

इस्लामाबादः अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर जियारत के लिए भारत द्वारा 500 से अधिक पाकिस्तानी जायरिनों को वीजा जारी नहीं करने पर पाकिस्तान ने सोमवार (19 मार्च) निराशा जतायी. विदेश कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि दौरा पाकिस्तान- भारत ‘प्रोटोकॉल ऑन विजिट्स टू रिलिजियस श्राइन्स’ समझौते के तहत होना था और यह वार्षिक होता है. बयान में कहा गया है, ‘भारत के अजमेर शरीफ में हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के उर्स के लिए 19 से 29 मार्च 2018 तक भारत द्वारा 503 पाकिस्तानी जायरीनों को वीजा जारी नहीं करने पर पाकिस्तान निराशा जताता है.’ भारत के निर्णय के कारण पाकिस्तानी श्रद्धालु उर्स में भाग लेने से वंचित रह जाएंगे, जिसका विशेष महत्व है.

भारत द्वारा जायरीनों को वीजा जारी नहीं करने पर पाकिस्तान ने जतायी निराशा
अजमेर शरीफ में हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के उर्स के लिए पाकिस्तानी जायरिनों को वीजा जारी नहीं किया गया. (प्रतीकात्मक फोटो)
खास बातें
पाकिस्तानी जायरिनों को वीजा जारी नहीं करने पर पाकिस्तान ने निराशा जतायी
अजमेर शरीफ में हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के उर्स के लिए वीजा
हजरत निजामुद्दीन औलिया के उर्स पर भी वीजा जारी नहीं हुआ था
इस्लामाबादः अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर जियारत के लिए भारत द्वारा 500 से अधिक पाकिस्तानी जायरिनों को वीजा जारी नहीं करने पर पाकिस्तान ने सोमवार (19 मार्च) निराशा जतायी. विदेश कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि दौरा पाकिस्तान- भारत ‘प्रोटोकॉल ऑन विजिट्स टू रिलिजियस श्राइन्स’ समझौते के तहत होना था और यह वार्षिक होता है. बयान में कहा गया है, ‘भारत के अजमेर शरीफ में हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के उर्स के लिए 19 से 29 मार्च 2018 तक भारत द्वारा 503 पाकिस्तानी जायरीनों को वीजा जारी नहीं करने पर पाकिस्तान निराशा जताता है.’ भारत के निर्णय के कारण पाकिस्तानी श्रद्धालु उर्स में भाग लेने से वंचित रह जाएंगे, जिसका विशेष महत्व है.

इससे पहले पिछले साल दिसंबर 2017 में भी पाकिस्तान ने दावा किया था कि भारत ने करीब 200 जायरीनों को वीजा देने से इनकार कर दिया जो देश में हजरत निजामुद्दीन औलिया के उर्स में भाग लेना चाहते थे. हालांकि इस मामले में भारत के विदेश विभाग ने बयान जारी कर कहा था कि पाकिस्तान एक से आठ जनवरी 2018 तक नई दिल्ली में आयोजित होने जा रहे उर्स में 192 पाकिस्तानी जायरीनों को आखिरी क्षण में भारत द्वार वीजा न दिए जाने पर क्षोभ व्यक्त करता है.

भारत के विदेश विभाग ने अपने बयान में कहा था कि भारत के फैसले के कारण पाकिस्तानी जायरीनों को उर्स में भाग लेने का मौका नहीं मिल पाएगा. उर्स का एक खास महत्व है. यह यात्रा धार्मिक स्थलों के दौरे पर 1974 के पाकिस्तान-भारत प्रोटोकॉल के प्रावधानों के तहत होनी थी और यह एक वार्षिक प्रक्रिया है. इसमें कहा गया कि द्विपक्षीय प्रोटोकॉल और धार्मिक आजादी के मूल मानवाधिकार का उल्लंघन होने के साथ ही ऐसे कदमों से माहौल बेहतर बनाने, लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य बनाने के प्रयासों को नुकसान पहुंचता है.

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