इस लड़की ने एक हफ्ते तक नहीं खाई चीनी, जानें क्या हुआ सेहत पर असर

नई दिल्ली: एक लड़की को मीठा खाने का बहुत शौक था. उसने एक दिन महसूस किया कि ज्यादा मीठा खाने पर उसके दिमाग पर एक धुंध सी छा जाती है. जब लगातार ऐसा होता रहा तो उसने एक हफ्ते तक किसी भी प्रकार का मीठा नहीं खाने की सोची. इसका उसने कड़ाई से पालन किया, जिसके बाद उसने अपनी हेल्थ में भी अंतर महसूस किया. अपनी डाइट को लेकर एक्सपेरिमेंट करने वाली ये लड़की अमेरिका के मिजूरी की एक प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी की छात्रा है. उसका नाम एना है.

अपना अनुभव साझा करते हुए एना ने बताया कि चीनी का असर देखते हुए उसने एक हफ्ते तक किसी भी प्रकार का मीठा नहीं खाने का निर्णय लिया. इस दौरान उन्होंने ऐसे खाद्य पदार्थों को भी नहीं खाया जिसमें मीठा डाला गया होता है. एना ने कहा कि लगभग सभी चीजों में चीनी मौजूद होती है, लेकिन सभी हानिकारक नहीं होतीं. फल व सब्जियों में मिलने वाली प्राकृति चीनी शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाती, क्योंकि इनमें फाइबर, मिनरल और विटामिन भी होते हैं.

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न्यूज रिपब्लिक में प्रकाशित लेख में एना की पूरे एक हफ्ते की डाइट के चार्ट भी डाले गए हैं. साथ ही में मीठे की शौकीन होने के कारण खुद को मीठा खाने से रोकना कितना चुनौतीपूर्ण होता है, इस बारे में भी एना ने अपना अनुभव शेयर किया है.

मुश्किल से निकला पहला दिन
पहले दिन एना ने अंडे, सब्जी, चिकन, टोस्ट आदि खाए और खुद को चीनी युक्त चीजें खाने से रोका. उन्होंने कहा कि पहला दिन सबसे कठिन होता है, क्योंकि आपको रोज मीठा खाने की आदत होती है और आप अचानक इसे खाना रोक देते हैं. एना ने कहा कि पहले दिन मीठा नहीं खाने पर उन्हें अपने शरीर में कुछ खास बदलाव महसूस नहीं हुए. हालांकि, इस दिन उन्हें नींद अच्छी आई.

तीन दिन में दिखने लगा असर
अगले तीन दिन भी उन्होंने मीठे से दूरी बनाते हुए हेल्दी खाना खाया. उन्हें महसूस हुआ कि रोज सुबह जल्दी उठना उनके लिए आसान हो गया था. दौड़ने के दौरान उन्हें कम मुश्किल हुई और वो ज्यादा दूरी तक दौड़ीं. इस बीच जब परीक्षा नजदीक आईं तो उन्हें मीठा खाने की ज्यादा इच्छा होने लगी. पांचवे दिन उन्हें अनुभव हुआ कि वे स्ट्रेस में आने पर मीठे का ज्यादा सेवन करती हैं. हालांकि, उन्होंने जैसे-तैसे खुद को कंट्रोल में रखा.

खाने के बाद इसलिए खाना चाहिए मीठा

छठवें दिन एना अपने घर के लिए रवाना हुईं. उन्होंने पाया कि उनके घर में ज्यादातर खाने की चीजें ऐसी थीं जिनमें ऐडेड शुगर थी. इस वजह से उन्हें पता भी नहीं चलता था कि वे कितनी चीनी खा रहे हैं. घर आने पर भी उन्होंने खुद पर काबू रखा और मीठे को छुआ भी नहीं.

सातवें दिन भी पहले दिन की तरह एना के लिए कठिन रहा. उनके घर में चारों ओर मीठी चीजें थीं. यहां तक कि उनकी फेवरेट आइसक्रीम भी फ्रिज में थी, लेकिन उन्होंने खुद को समझाया और आखिरी दिन भी मीठा खाने से बचीं.

सात दिनों बाद ये हुआ सेहत पर असर
एना बताती हैं कि उन्होंने पाया मीठा उनके लिए स्ट्रेस बस्टर है. जैसी भावनाएं होती है मीठा खाने की इच्छा भी वैसी ही होती है. उन्होंने पाया कि चीनी नहीं खाने से उनके वजन में भले ही ज्यादा फर्क नहीं पड़ा हो लेकिन उनके स्वास्थ पर काफी असर दिखा. वे बेहतर तरीके से नींद ले पा रही थीं और शरीर भी ज्यादा एक्टिव था. उनके आलस में कमी आई थी और उन्हें सुबह उठने में आसानी होने लगी थी. उन्हें जब ये बदलाव महसूस हुआ तब एना ने निर्णय लिया कि वे चीनी में कटौती करेंगी, ताकि उनका शरीर फिट रह सके और वे इन सात दिनों की तरह अच्छा महसूस करते रहें.

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