गरीब की पीड़ा कब समझेंगे “धरती के भगवान”

राजस्‍थान/जयपुर: प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल में रोजाना हजारों मरीजों का इलाज किया जाता है, लेकिन अस्पताल प्रबन्धन अपने रसूखदार डॉक्टरों का ही “इलाज” करने में फेल साबित हो रहा है. दरअसल हम बात कर रहे है अस्पताल के ओपीडी से नदारद रहने में खुद की शान समझने वाले डॉक्टरों की. जिनकी मनमानी से मरीजों की दिक्कतें लगातार बढ़ती जा रही है.

जी मीडिया की टीम शुक्रवार को एकबार फिर ओपीडी का औचक निरीक्षण करने पहुंची. इस दौरान पाया कि अस्पताल प्रशासन ने वैसे कहने को तो ओपीडी का समय सुबह 9 से 3 बजे तक का निर्धारित कर रखा है. लेकिन बड़े डॉक्टर ओपीडी में सुबह एक घंटे लेट व दोपहर में दो घंटे जल्दी जाते दिखाई दिए. जिसका सीधा असर मरीजों पर दिखाई दिया, कई मरीज जहां डॉक्टरों से परामर्श के लिए लंबी कतारों में इंतजार करते नजर आए तो कई जांच रिपोर्ट दिखाने के लिए घंटों से ओपीडी में बैठे मिले.

एसएमएस अस्‍पताल में 700 के आसपास मेडिकल कॉलेज की फैकल्टी है,900 से अधिक रेजीडेंटस चिकित्‍सों का स्‍टाफ है, एसएमएस ओपीडी मेें रोजाना औसतन 10 हजार मरीज आते हैं, ओपीडी की टाइमिंग सुबह 9 बजे से शाम 3 बजे तक की है लेकिन अधिकांश बड़े डॉक्‍टर सुबह 10 बजे सीट पर आते हैं और 1 बजे ही इधर-उधर होने लगते हैं.. ऐसे में मरीज परेशान होते रहते हैं.

आश्चर्य की बात यह है कि चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ से लेकर चिकित्सा शिक्षा सचिव आनन्द कुमार तक इस मामले को काफी गंभीर मान चुके है और इस बारे में एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रशासन को सख्ती बरतने के आदेश दे रखे है. लेकिन सच्चाई ये है कि न तो मेडिकल कॉलेज प्राचार्य और न ही अस्पताल अधीक्षक इस मामले में गंभीर है. नतीजन लोगों को यूं ही इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है.

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