घरेलू कामगारों को अपने हक की लड़ाई के लिए संगठित होना पड़ेगा- क्ष.अमिता चौहान

पनवेल : घरों में काम करने वाली महिलाओं, लड़कियों पर अत्याचार, शोषण की घटनाएँ हमें आये दिन देखने और सुनने को मिलती है। अपनी जीविका चलाने के लिये ये दुसरो के घरों में काम करने के लिए मजबूर है। उनका सिर्फ आर्थिक शोषण ही नहीं होता, उनके साथ होने वाली हिंसा, यौन शोषण, दुर्व्यवहार, अमानवीयता की खबरे जितनी सामने आती है। उससे सैकड़ो गुना ज्यादा वास्तव में होती है। नारीशक्ती जागृती फाऊंडेशन घरेलु कामगार महिलाओं को शोषण और हिंसा से बचाने का बीड़ा उठाया है।

नारीशक्ती जागृती फाऊंडेशन की संस्थापिका क्ष. अमिता चौहान ने 23 मार्च को आदई मे घरेलु कामगार महिलाओं के सक्षमीकरण के लिए उनके आरोग्य और सौंदर्य उपचार के लिए शिविर लिया। भारी संख्या में घरेलु कामगार महिलायें उपस्थित थी। मुख्य अतिथी में सौ. सुनंदा कारखिले और ब्युटीशन तृप्ती तिड़के उपस्थित थी। संस्थापिका क्ष. अमिता चौहान ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा की, घरों में काम करनेवाली महिलाओं की श्रमशक्ती की बड़ी आबादी बिना कामगार का दर्जा पाये काम करने के लिए मजबूर है। काम से जुड़े उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए कोई भी कानून नही है। और जो थोड़ा बहुत है भी, तो वह लागू नही होता। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार जीविका के लिए भारत में दुसरे घरों में काम करने वाली महिलाओं की संख्या एक करोड़ के आसपास है। इन महिलाओं को अपने काम से जुड़ी कानुनी सुरक्षा, छुट्टी मातृत्व, बच्चों का पालना घर, बीमारी के दशा में उपचार जैसी कोई सुविधा हासिल नही हो पाती। यह महिलायें ज्यादातर आर्थिक और सामाजिक रुप से पिछड़े और वंचित समुदाय की होती है। उनकी यह समाजिक हैसियत उनके लिए और भी अपमान जनक स्थितियॉं पैदा कर देती है। यौन उत्पीड़न, चोरी का आरोप, गालिओं की बौछार या घर के अंदर शौचालय आदि का प्रयोग ना करने देना एक आम बात है।

अगर कानून बनेगा तो घरेलु कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी का सवाल उठेगा इस लिए सरकार इस और ध्यान नही दे रही है। सौ. सुनंदा कारखिले और ब्युटीशन तृप्ती तिड़के ने भी अपने विचार प्रकट किये। दुर्गा कुवँर, रेखा सिंह, लक्ष्मी कुवँर, सेतू कुवँर और गौरी बॉपटी आदि भारी संख्या में घरेलु कामगार महिला उपस्थित थी। अंत में क्ष. अमिता चौहान ने सबका आभार प्रकट किये।

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