राहुल गांधी से क्यों कन्नी काट रही हैं ममता बनर्जी? ये हैं 5 वजह

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंगलवार (27 मार्च) को नई दिल्ली में रहेंगी. दिल्ली रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रीय राजधानी के चार दिवसीय दौरे पर कई विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात करेंगी. पूरे दौरे में ममता बनर्जी न तो राहुल गांधी से मिलेंगी और न ही सोनिया गांधी से भेंट करेंगी. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख का राष्ट्रवादी कांग्रेस (NCP) प्रमुख शरद पवार से मिलने का कार्यक्रम है. हवाईअड्डे पर उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि यह नियमित यात्रा है. उन्होंने कहा, ‘केन्द्रीय कक्ष एक प्रसिद्ध कक्ष है जहां मैं अपनी पार्टी के नेताओं से मिलूंगी और अगर विपक्ष के नेता मुझसे मिलना चाहते हैं तो मैं उनका स्वागत करती हूं. हम सभी मित्र हैं.’

गौरतलब है कि भाजपा नीत केन्द्र सरकार की आलोचक ममता ने हाल में 2019 लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा को हराने के लिए भाजपा रोधी बलों की एकजुटता का आह्वान किया था. यह पूछे जाने पर कि क्या वह संप्रग प्रमुख सोनिया गांधी से मिलेंगी, ममता ने कहा, ‘वह अस्पताल में भर्ती हैं. उन्हें ठीक होने दीजिए. मैं उन्हें परेशान नहीं करना चाहतीं.’

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में एक बात गौर करने वाली यह है कि ममता बनर्जी भले ही विपक्षी एकता की बात कर रही हैं, लेकिन वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी से से कन्नी काटती दिख रही हैं. आइए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर ममता बनर्जी ऐसा क्यों कर रही हैं?

विपक्ष का चेहरा बनना चाहती हैं ममता बनर्जी
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी से मुकाबले के लिए कांग्रेस सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने में जुटी है. साथ कांग्रेस ने लगभग साफ कर दिया है कि विपक्षी दलों के चेहरा राहुल गांधी ही होंगे, लेकिन ये बात सभी दलों को शायद मंजूर नहीं है. नीतीश कुमार के एनडीए में शामिल होने के बाद विपक्षी खेमे में जो जगह बनी है ममता बनर्जी उसके लिए विकल्प बनना चाहती हैं. हो सकता है कि ममता चाहती हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में गैर बीजेपी, गैर कांग्रेस की बात हो तो उनका नाम विकल्प साबित हो. यही वजह है कि ममता बनर्जी कांग्रेस को छोड़कर सभी विपक्षी दलों से रिश्ते सुधारने में जुटी हैं.

हिंदू विरोधी छवि से बाहर आने की कोशिश में ममता बनर्जी
पिछले साल दशहरा के मौके पर मुस्लिमों का त्योहार पड़ने की वजह से मूर्ति विसर्जन की तारीख बढ़ाने को लेकर ममता बनर्जी और उनकी सरकार की फजीहत हुई थी. हाईकोर्ट तक ने उन्हें फटकारा था. इस मुद्दे को लेकर बीजेपी ने उन्हें हिंदू विरोधी दिखाने की कोशिश की थी. इस आरोप को गलत साबित करने के लिए चैती नवरात्र के मौके पर टीमएसी कार्यकर्ताओं ने अपनी छवि हिंदू समर्थक के रूप में दिखाने की कोशिश की है. बीजेपी राहुल गांधी और कांग्रेस को भी हिंदू विरोधी दिखाने की कोशिश में जुटी रहती है. शायद ममता खुद को इन आरोपों से अलग रखना चाहती हैं.

कांग्रेस छोड़ सभी के प्रति नरम हैं ममता
कांग्रेस को छोड़कर ममता बनर्जी सभी विपक्षी दलों के साथ दोस्ती रखना चाहती हैं. यूपी और बिहार उपचुनाव में एसपी-बीएसपी गठबंधन और आरजेडी की जीत पर ममता बनर्जी ने ट्वीट कर लालू प्रसाद यादव और मायावती की तारीफ की थी. इसके अलावा उड़ीसा में नवीन पटनायक, महाराष्ट्र में शरद पवार व शिवसेना के प्रति भी उन्होंने नरमी दिखाई है. गुजरात चुनाव परिणाम के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने हार्दिक पटेल को बधाई दी और उन्हें अपने राज्य आने का न्योता दिया. ये साफ संकेत है कि ममता सभी दलों को साधकर विपक्षी दलों में सबसे बड़े चेहरा के रूप में अपनी दावेदारी पेश कर सकती हैं.

कांगेस-वाम की दोस्ती से ममता नाराज
हाल के दिनों में कांग्रेस और वाम दलों के बीच दोस्ती बढ़ गई है. कांग्रेस ने ममता बनर्जी के बजाय वाम दलों को ज्यादा तरजीह दी है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में लेफ्ट के साथ कांग्रेस ने गठबंधन किया, जबकि ममता कांग्रेस के साथ गठबंधन करने को इच्छुक थीं. पश्चिम बंगाल में बड़ी जीत के बाद ममता बनर्जी ने कहा था कि किस तरह वह विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से गठबंधन के लिए दिल्ली में तीन दिनों तक थीं, लेकिन पार्टी के किसी नेता ने बात तक नहीं की. इसके अलावा कई दूसरों मुद्दों पर टीएमसी ने आरोप लगाया कि उन्हें विपक्षी एकता की कोशिशों के दौरान विश्वास में नहीं लिया गया.

राहुल ने ममता पर कसा था तंज: साल 2015 में राहुल गांधी ने ममता बनर्जी और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच दोस्ती का आरोप लगाया था. बीजेपी और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के बीच अच्छे रिश्ते का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने कहा था, ‘जब हमारी (यूपीए) सरकार थी और हमारे प्रधानमंत्री बांग्लादेश जाना चाहते थे, तब हमने उनसे (ममता बनर्जी से) बातचीत की थी और उनसे हमारे साथ चलने का अनुरोध किया था, लेकिन तब उन्होंने हमसे कहा, ‘नहीं, एकला चलो रे’.’

राहुल गांधी ने कहा, ‘अब, मोदी जी वहां (सत्ता में) हैं, तो अब ममता की तरफ से कोई एकला चलो नहीं हो रहा. हम साथ चलेंगे, यह क्यों हो रहा है? यह दोस्ती किस बात को लेकर है? आप कारण अवश्य समझ रहे होंगे.’ बता दें कि ममता बनर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बांग्लादेश की यात्रा के दौरान ढाका में है

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