विधवाओं के कल्याण को लेकर कुछ राज्यों का सूचना मुहैया ना कराना दुर्भाग्यपूर्ण: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने विधवाओं एवं वंचित महिलाओं के उन्नयन और कल्याण से जुड़़ी कार्य योजना को लेकर केंद्र को सूचना मुहैया ना कराने के लिए कई राज्यों को फटकार लगायी है तथा इसे‘‘ बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’’ कहा. सुप्रीम कोर्ट ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा दायर हलफनामे को पढ़ने के बाद यह भी कहा कि कुछ राज्यों द्वारा दी गयी सूचना अपूर्ण है. न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की एक पीठ ने सभी राज्यों एवं एवं केंद्र शासित प्रदेशों को दो हफ्ते के अंदर‘‘ पूरी सूचना’’ मुहैया कराने का निर्देश दिया. पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘( मंत्रालय द्वारा दायर) हलफनामे को पढ़ने से पता चलता है कि कुछ राज्यों ने मंत्रालय को जरूरी सूचना नहीं दी है और कुछ राज्यों ने जो सूचना दी है, वह अपूर्ण है. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.’’

शीर्ष अदालत ने इससे पहले राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से राज्य महिला आयोगों, राष्ट्रीय महिला आयोग और मंत्रालय को अपने प्रस्तावित उपायों की जानकारी देने को कहा था ताकि विधवाओं की दशाएं सुधारने के लिए एक संयुक्त प्रयास एवं निगरानी की जा सके.

न्यायालय ने कहा, ‘‘ हम राष्ट्रीय महिला आयोग से सूचना जुटाने एवं उनका विश्लेषण करने में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की मदद करने की उम्मीद करते हैं.’’ सुनवाई के दौरान एनसीडब्ल्यू के वकील ने कहा कि वंचित महिलाओं एवं विधवाओं के लिए कई योजनाएं हैं और उनका संकलन एवं विश्लेषण मुहैया कराया जाना उचित होगा.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले अक्टूबर महीने में इस मामले पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या देश भर में महिलाओं के लिए बने राज्य महिला आयोग सच में अस्तित्व में हैं? सुप्रीम कोर्ट ने वृंदावन और ऐसे दूसरे स्थानों पर रह रहीं निराश्रित विधवाओं द्वारा सामना की जाने वाली मुश्किल स्थितियों से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यह सवाल उठाया. देशभर में ऐसी विधवाओं की स्थिति से जुड़े एक मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या इन राज्यों में राज्य महिला आयोग मौजूद नहीं हैं और अगर नहीं हैं तो संबंधित राज्य सरकारों को ऐसे पैनल की स्थापना को सुनिश्चित करने के लिए कहा जाना चाहिए.

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा, “सॉलीसीटर जनरल को हमें यह भी सूचित करना चाहिए कि क्या वास्तव में सभी राज्यों में राज्य महिला आयोग अस्तित्व में हैं भी या नहीं और अगर नहीं हैं तो राज्य सरकारों को इस बात को सुनिश्चित करने के लिये एक पत्र भेजा जाना चाहिए कि कानून के अनुसार राज्य महिला आयोगों का गठन होना चाहिए.’’ केंद्र ने पीठ को बताया कि वह तैयार कार्य योजना पर एक हलफनामा प्रस्तुत करे जिसमें निराश्रित विधवाओं की स्थिति को सुधारने के लिए कई जरूरी कदमों की बात शामिल होगी. इस पीठ में न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता भी शामिल हैं.

अदालत ने केंद्र से छह हफ्तों के भीतर जरूरी कदम उठाने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई की तारीख छह दिसबंर को तय की है. विधवा पुनर्विवाह को “एक उम्मीद की किरण” की तरह देखते हुए शीर्ष अदालत ने विधवाओं की स्थिति पर शीर्ष अदालत में प्रस्तुत किए गए रिपोर्टों का अध्ययन करने के लिये छह सदस्यीय एक समिति का गठन किया था और इस साल 30 नवंबर तक एक साझा कार्य योजना पेश करने को कहा था.

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