भागलपुर हिंसा : केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अरिजित शाश्वत की अग्रिम जमानत याचिका रद्द

पटना : रामनवमी तथा भारतीय नववर्ष के मौके पर बिहार के भागलपुर में हुई हिंसा में पुलिस ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अरिजित शाश्वत के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया था. अरिजित पर दो समुदायों में हिंसा भड़काने का आरोप है. उन्होंने पुलिस की इस रिपोर्ट को खारिज करने के लिए हाईकोर्ट में अपील दायर की है. इसके अलावा भागलपुर की कोर्ट में ही उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी. जिसे कोर्ट ने खारीज कर दिया.

कोर्ट में अरिजित समेत 9 आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी. करीब एक घंटे तक इस मुद्दे पर कोर्ट में बहस हुई. बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी. अन्य आरोपियों की याचिका पर अगली तारीख में सुनवाई की जाएगी.

हिंदू नव वर्ष पर निकाला था जुलूस
बता दें कि 17 मार्च को भारतीय नववर्ष की पूर्व संध्या पर भागलपुर में एक जुलूस निकाला गया था. इस जुलूस में डीजे पर बज रहे आपत्तिजनक गानों के बाद दो समुदायों में टकराव हो गया. इस जुलूस का नेतृत्व अरिजित शाश्वत चौबे कर रहे थे तथा बीजेपी, आरएसएस और बजरंग दल के लोग इसमें शामिल हुए थे. जुलूस के दौरान हुए दंगे में दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे. पुलिस का आरोप है कि इस जुलूस को बिना पुलिस की अनुमति के निकाला गया था.

उधर, अपने बेटे पर हुई एफआईआर पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि उनके बेटे को फंसाया जा रहा है. दंगे में उनके बेटे का कोई हाथ नहीं है. उन्होंने कहा कि एक राजनीति के तहत उन्हें और उनके परिवार को बदनाम किया जा रहा है.

केसी त्यागी ने कहा, सरेंडर करें या गिरफ्तारी दें
केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अरिजित शाश्वत की गिरफ्तार को लेकर बिहार की राजनीति में भूचाल आया हुआ है. इस मुद्दे पर विधानमंडल के अंदर और बाहर जोरदार हंगामा हुआ. इस मुद्दे पर जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि अरिजित शाश्वत को सरेंडर करना चाहिए या फिर गिरफ्तारी देनी चाहिए. केसी त्यागी ने अरिजित शाश्वत की गिरफ्तारी को लेकर कहा कि अगर एफआईआर दर्ज हुई है तो हमें अपने अधिकारियों पर विश्वास करना चाहिए या अदालत ने वारंट जारी किए हैं तो अदालत का सम्मान करना चाहिए. दो रास्ते हैं, अरिजित कोर्ट में सरेंडर कर दें या फिर वह गिरफ्तारी दें.

अंधा हो गया है प्रशासन
उधर, अपने बेटे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने पर अश्विनी चौबे ने बिहार प्रशासन का अंधा बताया. उन्होंने कहा कि शोभा यात्रा में कुछ अराजक तत्‍वों ने गलत कार्य किए. प्रशासन उन लोगों को गिरफ्तार करने में असमर्थ रहा. ऐसे में सभी आरोप शोभा यात्रा पर लगा दिए गए.

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