हरकतों से बाज नहीं आ रहा चीन, अरुणाचल में बनाए PLA के कैंम्प और पोस्ट

नई दिल्ली: लगता है चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. डोकलाम में मुंह की खाने के बाद उसने अरुणाचल के एक हिस्से में निर्माण कार्य शुरू कर दिया है. अरुणाचल प्रदेश के किबिथु की दूसरी ओर टाटू में चीन ने इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिए हैं, जिसमें चीनी सेना (पीएलए) के कैम्प और घर भी शामिल हैं. समाचार एजेंसी एएनआई ने एक के एक तस्वीरें जारी की हैं. इन तस्वीरों में चीनी निर्माण को साफ तौर पर देखा जा सकता है. गौरतलब है कि भूटान के दावे वाले क्षेत्र डोकलाम में भारतीय सेना द्वारा चीन के निर्माण कार्य को रोकने की वजह से पिछले साल जून में दोनों सेनाएं एक-दूसरे के आमने-सामने आ गई थीं. डोकलाम भारतीय सीमा के काफी नजदीक है, जो इसके पूर्वोत्तर भाग को देश के बाकी हिस्से से जोड़ता है. यह गतिरोध 73 दिनों के बाद 28 अगस्त को समाप्त हुआ था.

एक अन्य तस्वीर में यह भी दिखाया गया है कि चीन ने किस तरह से टाटू में दूरसंचार टावर खड़े कर लिए हैं और साथ में ऐसे पोस्ट भी बनाए हैं जहां से वे सर्विलांस उपकरणों के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर नजर बनाए हुए हैं. भारत-चीन के बीच लंबी सीमा तीन क्षेत्रों में विभक्त है. पश्चिमी क्षेत्र लद्दाख और अक्साई चीन के बीच है, मध्य क्षेत्र उत्तराखंड और तिब्बत के बीच है और पूर्वी क्षेत्र तिब्बत को सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से अगल करता है.

चीन के यथास्थिति में बदलाव से एक और डोकलाम संभव : भारतीय राजदूत
इससे पहले चीन में भारत के राजदूत गौतम बंबावले ने कहा था कि भारतीय सीमा पर यथास्थिति में बदलाव करने के चीन के किसी भी प्रयास से एक और डोकलाम जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. उन्होंने साथ ही कहा कि ऐसी घटनाओं से बचने का सर्वोत्तम उपाय स्पष्ट और खुलकर बातचीत करना है. हांगकांग स्थित साउथ चाइना मार्निग पोस्ट को दिए साक्षात्कार में बंबावले ने कहा, “दोनों देशों के बीच सीमा निर्धारण न होना एक गंभीर समस्या है और दोनों देशों को तत्काल अपनी सीमाओं को पुनर्निधारण की जरूरत है.”

बंबावले ने 24 मार्च को प्रकाशित साक्षात्कार में कहा, “भारत-चीन सीमा पर शांति और तिराहा बनाए रखने के लिए, कुछ खास क्षेत्र हैं जोकि बेहद संवेदनशील हैं और हमें यहां यथास्थिति नहीं बदलनी चाहिए. अगर कोई यथास्थिति बदलता है तो, इससे जो डोकलाम में हुआ था, वैसी ही स्थिति पैदा हो जाएगी.”

उन्होंने कहा, “चीनी सेना ने डोकलाम क्षेत्र में यथास्थिति बदली और इसलिए भारत ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की. चीनी सेना की ओर से यथास्थिति बदलने के कारण हमने प्रतिक्रिया दी थी. जब गत वर्ष डोकलाम जैसी स्थिति पैदा हुई थी, इसका मतलब था कि हम एक दूसरे के साथ खुले और स्पष्ट नहीं थे. इसलिए हमें एक-दूसरे के साथ खुलापन बढ़ाने की जरूरत है.”

राजदूत ने कहा, “इसका मतलब है, अगर चीनी सेना सड़क बनाने जा रही है, तो उन्हें हमें अवश्य ही यह कहना चाहिए कि ‘हम सड़क बनाने जा रहे हैं’. अगर हम इस पर सहमत नहीं होंगे, तो हम यह जवाब दे सकते हैं कि आप यथास्थिति बदल रहे हो. कृपया ऐसा न करें. यह काफी संवेदनशील क्षेत्र है.”

‘चीनी डोकलाम’ में यथास्थिति में बदलाव जैसी चीज ही नहीं : चीन
वहीं दूसरी ओर चीन ने बीते 26 मार्च को कहा था कि डोकलाम एक ‘चीनी क्षेत्र’ है और यथास्थिति में बदलाव को लेकर कोई सवाल ही नहीं खड़ा होता. इसके पहले भारतीय राजदूत गौतम बंबावले ने डोकलाम में यथास्थिति में किसी तरह के बदलाव की कोशिश के खिलाफ चीन को चेताया था.

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, “सीमा मुद्दे के संबंध में, चीन वहां शांति, स्थिरता और तिराहा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और डोंगलांग(डोकलाम) चीन का हिस्सा है, क्योंकि हमारे पास ऐतिहासिक करार है. इसलिए चीन की गतिविधि वहां उसके संप्रभु अधिकार के अंतर्गत है. वहां यथास्थिति बदलाव जैसी कोई चीज ही नहीं है.”

हुआ ने कहा, “पिछले वर्ष, हमारे जोरदार प्रयास, हमारे कूटनीतिक प्रयास और बुद्धिमत्ता की वजह से हम इस मुद्दे को समुचित रूप से सुलझा सके थे.” उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि भारतीय पक्ष इससे कुछ सबक लेगा और ऐतिहासिक करार को मानेगा, साथ ही सीमा पर शांति और स्थिरिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए चीन के साथ मिलकर काम करेगा.”

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