राजनीति के ये 5 धुरंधर ममता बनर्जी के मंसूबे पर फेरेंगे पानी?

नई दिल्ली: देशभर में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रभाव के चलते विपक्षी दलों के सामने अपना अस्तित्व बचाने की चुनौती आ खड़ी हुई है. बीजेपी का विजय अभियान रोकने के लिए विपक्षी दलों के नेता अपने-अपने हिसाब से प्लानिंग में जुट गए हैं. इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे के बाद से थर्ड फ्रंट की बात चर्चा में है. विभिन्न दलों के नेताओं के साथ बातचीत के बाद ममता बनर्जी ने भी संकेत दिया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय दलों को एकजुट करके वह गैर बीजेपी, गैर कांग्रेस विकल्प देना चाहती हैं. हालांकि क्षेत्रीय दलों के हालिया बयानों पर गौर करें तो ममता बनर्जी के मंसूबे पर पानी फिरता दिख रहा है. आइए 5 बड़ी क्षेत्रीय पार्टियों के बड़े नेताओं के बयान पर एक नजर डालते हैं.

शरद पवार: ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे के दौरान एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार के साथ पार्टी के बड़े नेता प्रफुल्ल पटेल ने भी मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद प्रफुल्ल पटेल ने कहा था, ‘मेरी ममता बनर्जी बनर्जी से बातचीत हुई, जो काफी सकारात्मक रही है। मैंने उन्हें 27-28 मार्च को एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार की ओर से दिल्ली में बुलाई गई बैठक के लिए आमंत्रित किया है ताकि विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ मिलकर भावी कार्य योजना तैयार की जा सके। प्रारंभिक बातचीत में वैकल्पिक मोर्चे के लिए भावी रणनीति तैयार की जाएगी। वहीं न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट में कहा गया है कि शरद पवार मौजूदा राजनीतिक हालात में थर्ड फ्रंट के हिमायती नहीं हैं. वह कांग्रेस के साथ ही जाना चाह रहे हैं. महाराष्ट्र में उन्होंने कांग्रेस के साथ मिलकर 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने के संकेत पहले ही दे चुके हैं.

अखिलेश यादव: देश में सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें देने वाले राज्य उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के हालिया प्रेस कांफ्रेंस पर नजर डालें तो वे भी कांग्रेस का साथ छोड़ने के मूड में नहीं हैं. अखिलेश हालिया बयानों में कई दफा कह चुके हैं कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ हुई उनकी दोस्ती अब भी कायम है.

मायावती: दलित राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा मायावती ने अब तक कांग्रेस को लेकर अब तक कुछ भी स्पष्ट बयान नहीं दिया है, लेकिन राजनीति के जानकार मानते हैं वह भी थर्ड फ्रंट को लेकर गंभीर नहीं हैं. माना जाता है कि अगर बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी मिलकर 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ती है तो वह इस गठबंधन में कांग्रेस को अलग रखकर विपक्षी एकता को कमजोर नहीं करना चाहेंगी. वैसे भी यूपीए सरकार को सपा और बसपा बाहर से समर्थन करती रही है.

लालू प्रसाद यादव: बिहार की राजनीति में सबसे बड़े दल और मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी के प्रमुख लालू प्रसाद यादव भी स्पष्ट कर चुके हैं कि कांग्रेस के बगैर किसी गठबंधन की परिकल्पना बेकार है. हाल ही में लालू यादव ने कहा है कि विपक्षी एकता तो जरूरी है, लेकिन इसमें कांग्रेस को अलग नहीं रखा जा सकता है.

करुणानिधि: तमिलनाडु की राजनीति में जयललिता की मौत और उनकी पार्टी के नेताओं के बीच आपसी कलह के चलते एआईडीएमके कमजोर हुई है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि आगामी चुनावों में यहां की जनता डीएमके पर फिर से भरोसा दिखा सकती है. ममता बनर्जी भी कह चुकी हैं तमिलनाडु में एम करुणानिधि की पार्टी एआईडीएमके जीत सकती है. करुणानिधि को साथ लाने के लिए ममता उनसे मिलने भी जा सकती हैं, लेकिन उनकी पार्टी के नेताओं के हालिया बयान पर गौर करें तो फिलहाल इनके कांग्रेस से अलग होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं.

अपने-अपने राज्यों में मजबूत ये 5 पार्टियां अगर ममता बनर्जी को सपोर्ट नहीं करती हैं तो भला थर्ड फ्रंट की बात परिकल्पना मात्र रह जाएगी.

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