मानहानि केस: CM केजरीवाल, संजय सिंह और आशुतोष ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से मांगी माफी

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व पार्टी के अन्य नेताओं ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ आरोप लगाने को लेकर माफी मांग ली है. केजरीवाल के एक सहयोगी ने कहा कि वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा दाखिल मानहानि के मामले को वापस लेने के लिए आप नेताओं व जेटली द्वारा सोमवार (2 अप्रैल) को दिल्ली की अदालत में एक संयुक्त याचिका दाखिल की गई. केजरीवाल के अलावा, जिन अन्य आप नेताओं ने जेटली से माफी मांगी है, उनमें आप सांसद संजय सिंह, वरिष्ठ नेता आशुतोष, दीपक बाजपेयी व प्रवक्ता राघव चड्ढा शामिल हैं.

सूत्रों का कहना है केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा दायर मानहानि याचिका वापस नहीं ली जा रही है, बल्कि सीएम अरविंद केजरीवाल सहित आप नेताओं ने अदालती आदेश के तहत संयुक्त पत्र लिखा है.

इससे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बीते 19 मार्च को मानहानि के एक मामले को खत्म करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता नितिन गडकरी से माफी मांगी थी. केजरीवाल ने गडकरी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, जिसे साबित नहीं किया जा सका. उनकी माफी के बाद केंद्रीय मंत्री ने अपनी मानहानि का मामला वापस ले लिया था.

गडकरी ने अपना नाम केजरीवाल द्वारा ‘भ्रष्ट राजनेताओं’ की सूची में डालने के बाद 2014 में आप नेता के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था. केजरीवाल ने गडकरी को लिखे एक पत्र में कहा था कि “अपने उस बयान के लिए खेद महसूस कर रहा हूं, जिसे प्रमाणित नहीं किया जा सका और जिससे आप को दुख पहुंचा है.” उन्होंने कहा, “मैं निजी तौर पर आपके खिलाफ नहीं हूं. मैं अफसोस जाहिर करता हूं. हम इस घटना को पीछे छोड़ दें और अदालती कार्यवाही को बंद करें.”

बीते 19 मार्च को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के बेटे सीनियर वकील अमित सिब्बल द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में उनसे माफी मांग ली. केजरीवाल और सिसोदिया ने अपने माफीनामे में सिब्बल के खिलाफ लगाए‘ बेबुनियाद आरोपों’ के लिए एक पत्र में माफी मांगी. यह पत्र अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल को सौंपा गया. सिब्बल और आप नेताओं ने संयुक्त आवेदन देकर अदालत से मामला वापस लेने का अनुरोध किया. यह केस वर्ष 2013 में दायर किया गया था.

इससे पहले आप नेता (अरविंद केजरीवाल) ने बीते 15 मार्च को शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया पर बिना साक्ष्यों के मादक पदार्थो के व्यापार में शामिल होने के आरोपों पर माफी मांग ली थी. इस माफी से आप की पंजाब इकाई में विद्रोह भड़क गया, जिसे लेकर पंजाब की आप इकाई के प्रमुख पद से भगवंत मान ने इस्तीफा दे दिया था. 2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अरविंद केजरीवाल ने बिक्रम मजीठिया पर लगातार हमला करते हुए उन्हें ड्रग्स माफिया बताया था. केजरीवाल ने अपनी हर चुनावी रैली में पंजाब में नशे का मुद्दा उठाते हुए इसके लिए बिक्रम मजीठिया को जिम्मेदारी ठहराया था. अपनी रैलियों उन्होंने यहां तक कहा था कि यदि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो बिक्रम मजीठिया जेल में होगा, लेकिन पंजाब में आम आदमी पार्टी चुनाव हार गई और राज्य में कांग्रेस की सरकार बन गई. बिक्रम मजीठिया ने केजरीवाल की टिप्पणी पर उनके खिलाफ अमृतसर की कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दाखिल कर दिया था.

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