गुजरात हाईकोर्ट ने मैरिटल रेप को दंडनीय अपराध बनाने पर दिया जोर

गुजरात हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा कि अप्राकृतिक तौर-तरीके विवाह संबंधों में बलात्कार को बढ़ावा देते हैं और वैवाहिक बलात्कार को अवैध बना कर ही इसे समाप्त किया जा सकता है.

अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा कि मैरिटल रेप(वैवाहिक बलात्कार) को दंडनीय अपराध घोषित किया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि अप्राकृतिक तौर-तरीके विवाह संबंधों में बलात्कार को बढ़ावा देते हैं और वैवाहिक बलात्कार को अवैध बना कर ही इसे समाप्त किया जा सकता है.

न्यायाधीश जेबी पारदीवाला ने एक डॉक्टर की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसा रवैया जो वैवाहिक संबंधों में बलात्कार को बढावा देता है उसे अवैध या अपराध बना कर ही समाप्त किया जा सकता है. दरअसल एक डॉक्टर की पत्नि ने अपने पति के खिलाफ बलात्कार की एफआईआर दर्ज कराई थी. इसी मामले में आरोपी ने एफआईआर को रद्द करने के लिए गुजरात हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी.

हालांकि जज ने डॉक्टर के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को आंशिक रूप से रद्द करने का आदेश दिया और कहा कि धारा 376 ( बलात्कार का दंड) और 377( अप्राकृतिक यौन संबंध) याचिकाकर्ता के खिलाफ लागू नहीं होगा. कोर्ट ने डॉक्टर के खिलाफ धारा 354 ( यौन उत्पीड़न) और 498 ( ए) के तहत मामला दर्ज करने को कहा है. आरोपी शख्स साबरकांठा जिले के इदर में डॉक्टर है.

वहीं डॉक्टर की पत्नि ने अदालत को बताया कि उसका पति मानसिक और शारीरिक शोषण करता है और अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने का दबाव बनाता है. इस पर हाईकोर्ट ने पुलिस को डॉक्टर के खिलाफ धारा 354 ( यौन उत्पीडन) और 498 ( ए) के तहत मामला दर्ज करने को कहा है.

न्यायमूर्ति पारदीवाला ने अपने आदेश में कहा, ‘‘वैवाहिक बलात्कार को अवैध अथवा अपराध बनाने से ये विनाशकारी रवैया समाप्त हो जाएगा जो विवाह संबंधों में बलात्कार को बढ़ावा देते हैं.’’ इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने पुलिस से चिकित्सक के खिलाफ बलात्कार और अप्राकृतिक यौन संबंध के आरोप हटाने के निर्देश दिए. कोर्ट ने डॉक्टर के खिलाफ क्रूरता और यौन उत्पीड़न की जांच करने को कहा है.

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