भारत की आजादी में गांधीजी ही नहीं कमलादेवी का भी था अहम योगदान, जानिए इनके बारे में खास बातें

भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक कमलादेवी चट्टोपाध्याय का आज 115वां जन्मदिवस है। भारत को स्वतंत्र कराने में कमालादेवी की भूमिका को याद किया जाता है।

आइए आपको बताते है कमलादेवी चट्टोपाध्याय के जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जिसे आपको जानना चाहिए-

उनका जन्म 3 April 1903 को हुआ था। उन्होंने महिलाओं की स्थिति में बेहतरी लाने के लिए सहकारिता आंदोलन की शुरुआत की।
आजादी के बाद थिएटर को भुलाया जाने लगा। लेकिन कमलादेवी ने रंगमंच की दुनिया में नई जान फूंकने में अपना अभूतपु्र्व योगदान दिया। जिसे आज भी याद किया जाता है।
आज भारत में परफॉर्मिंग आर्ट से जुड़े कई संस्थान कमलादेवी के विजन का ही नतीजा हैं। इन संस्थानों में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, संगीत नाटक एकेडमी आदि शामिल है।
जिन्होंने महिलओं की बेहतरी के लिए लड़ा, खुद उनकी शादी तो 14 साल की उम्र में हो गई। लेकिन दो साल के अंदर ही उनके पति का देहांत हो गया। लेकिन जल्द ही उनकी दूसरी शादी हरेंद्र नाथ चट्टोपाध्याय से हुई।
उन्होंने ऐसे समय में अपनी दूसरी शादी की जब विधवा-विवाह को भारतीय संस्कृति में खराब माना जाता था। लेकिन जात-बिरादरी की पर्वाह किए गए बगैर अपने जीवन में वे आगे बढ़ी। इससे दूसरी महिलाओं को भी सीख मिली।
उन्होंने फिम्मी दुनिया में भी अपना अहम योगदान दिया। उन्होंने कन्नड़ की साइलेंट फिल्म ‘मृच्छकटिका’ में काम किया। साथ ही उन्होंने ‘शंकर पार्वती (1943)’ और ‘धन्ना भगत (1945)’ जैसी फिल्मों में भी काम किया।
कमलादेवी ने भारत की आजादी मे अपना अहम योगदान दिया। वे महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में कूद गई। साथ ही उन्होंने गांधीजी के नमक सत्याग्रह में भी हिस्सा लिया।
इसी तरह कमलादेवी चट्टोपाध्याय ने महिलाओं के हित के साथ-साथ भारत की आजादी को लेकर भी काफी सपने सजोए थे। जिसे उन्होने पूरा किया और उनका हिंदुस्तान को स्वतंत्र कराने और फिल्मी दुनिया में काम करने तक का सफर काबिले-तारीफ रहा है और देश उनके योगदान को हमेशा याद रखेगा।

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