मौत के मुआवजे को शादी समारोह में खर्च नहीं किया जा सकता: राजस्‍थान हाई कोर्ट

यदि किसी परिवार के कमाने वाले शख्‍स की असामयिक मृत्‍यु हो जाती है तो उसके बाद मिले मुआवजे का इस्‍तेमाल शादी के खर्च में नहीं किया जा सकता. राजस्‍थान हाई कोर्ट ने यह व्‍यवस्‍था दी है. जी मीडिया के अखबार DNA की रिपोर्ट के मुताबिक एक विधवा फूली देवी और अन्‍य की याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्‍थान हाई कोर्ट के जज जस्टिस एसपी शर्मा ने यह निर्णय दिया. दरअसल इसमें पति की एक्‍सीडेंट के बाद मिले मुआवजे की 2.75 लाख रुपये की फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट को समय से पहले ही रिलीज करने की गुजारिश की गई थी. इसके पीछे याची फूली देवी ने तर्क दिया था कि दरअसल उनको बेटी की शादी के लिए इस पैसे की जरूरत है. इस पर कोर्ट को बताया गया कि वह पहले ही 4.75 लाख रुपये निकाल चुकी हैं.

याचिका खारिज
कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि परिवार के लिए विशेष सुरक्षा उपायों के तहत यह मुआवजा राशि दी जाती है. इसको शादी समारोह में खर्च नहीं किया जा सकता. इसके साथ ही कोर्ट ने सामाजिक न्‍याय विभाग को विधवा की बेटी की शादी का इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा.

इसके साथ ही जस्टिस शर्मा ने यह भी कहा कि शादी में अंधाधुंध खर्च एक फैशन बन गया है. हर आदमी दिखावे में बढ़-चढ़कर खर्च कर रहा है. शादी में होने वाले खर्च से व्‍यक्ति की समाज में हैसियत का आकलन किया जाता है. इस वजह से लोग बेवजह अपनी संपत्ति खर्च कर देते हैं. कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्‍य सरकारों को शादी में होने वाले अनाप-शनाप खर्च को रोकने से संबंधित कानून बनाना चाहिए. प्राचीन समय में शादियां मंदिर में होती थीं और अब कोर्ट में शादियों को किए जाने का प्रावधान

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