श्रीलंका: प्रधानमंत्री की बढ़ी मुसीबतें, राष्ट्रपति की पार्टी अविश्वास प्रस्ताव का करेगी समर्थन

श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरीसेना की पार्टी ने सांसत में फंसे प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को औपचारिक तौर से सूचित कर दिया कि वह संयुक्त विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव की हिमायत करेगी.

कोलंबो: श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरीसेना की पार्टी ने सांसत में फंसे प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को औपचारिक तौर से सूचित कर दिया कि वह संयुक्त विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव की हिमायत करेगी. विक्रमसिंघे(68) सिरीसेना की श्रीलंका फ्रीडम पार्टी( एसएलएफपी) के साथ गठबंधन में राष्ट्रीय एकता सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं. कल संसद में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेंगे. अश्विवास प्रस्ताव पर रात सेही प्रमुख नेताओं के बीच चर्चा का सिलसिला जारी है.राजनीतिक सूत्रों ने बताया कि वरिष्ठ एसएलएफपी नेता एवं विमानन मंत्री निमल सिरीपाला डे सिल्वा ने प्रधानमंत्री को आज सुबह पार्टी के निर्णय से अवगत करा दिया है.

कल आने वाले प्रस्ताव को स्पीकर कारू जयसूर्या को संयुक्त विपक्ष ने पिछले महीने सौंपा था. संयुक्त विपक्ष ने विक्रमसिंघे पर आर्थिक कुप्रबंधन और पिछले महीने मध्य कैंडी जिले में मुस्लिम विरोधी दंगों से निपटने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है. एसएलएफपी ने आज सुबह कहा कि प्रधानमंत्री को प्रस्ताव का सामना करने के बजाय इस्तीफा दे देना चाहिए.

विक्रमसिंघे की यूनाइटिड नेशनल पार्टी( यूएनपी) के एक प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने त्याग पत्र देने से इनकार कर दिया है. यूएनपी नेता और राज्य मंत्री हर्ष डी सिल्वा ने कहा, ‘‘ हम कल प्रस्ताव को शिकस्त देंगे. ’’ सिरीसेना चाहते हैं कि विक्रमसिघे हट जाएं ताकि वह अपनी पसंद के व्यक्ति को प्रधानमंत्री बना सकें.

संयुक्त विपक्ष लाएगा अविश्वास प्रस्ताव
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे के समर्थन वाला संयुक्त विपक्ष प्रधानमंत्री रानील विक्रमसिंघे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया है. संयुक्त विपक्ष (जेओ) के सांसद रंजीत सोयसा ने शनिवार को कहा कि 68 वर्षीय विक्रमसिंघे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव अगले सप्ताह सदन की कार्रवाई शुरू होने के बाद संसद के अध्यक्ष को सौंपा जाएगा. वहीं राजपक्षे ने कहा कि वह सरकार गिराने के करीब हैं. जेओ ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव में विक्रमसिंघे के खिलाफ पिछले तीन वर्ष में किए गए आर्थिक कुप्रबंध का आरोप भी शामिल है. हाल ही में विक्रमसिंघे को मध्य कैंडी जिले में हिंसा भड़कने के बाद कानून एवं विधि मंत्री के पद से हटा दिया गया था.

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