राज्यसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, वेंकैया नायडू ने जताया खेद

नयी दिल्ली: 29 जनवरी से शुरू हुए राज्यसभा के बजट सत्र की कार्यवाही आज अनिश्चितकाल के लिये स्थगित हो गई. बजट सत्र का दूसरा चरण विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गया. सभापति वेंकैया नायडू ने इस पर खेद जताते हुए कहा कि ‘लोगों की चिंताओं और अपेक्षाओं को पूरा करने में हमारा योगदान ना के बराबर रहा.

पीएनबी घोटाला मामले, आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग तथा कावेरी जल विवाद सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण पांच मार्च से शुरू हुए बजट सत्र के दूसरे चरण में लगातार गतिरोध बना रहा. इस वजह से सरकारी विधेयक तो क्या बजट के महत्वपूर्ण अंग, वित्त विधेयक पर भी उच्च सदन में चर्चा नहीं हो सकी.

सभापति ने जताया दुख
सभापति वेंकैया नायडू ने सत्र को अनिश्चितकाल के लिये स्थगित करने से पहले अपने संबोधन में कहा कि ‘गतिरोध के कारण सदन के कीमती 120 घंटे बर्बाद हो गए जबकि मात्र 45 घंटे कामकाज हुआ. नायडू ने कहा कि ‘ग्रेच्युटी भुगतान संशोधन विधेयक को बिना चर्चा के पारित करने के अलावा सदन में कोई विधायी कार्य नहीं हुआ. उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण कानून के बारे में एक फैसला सुनाया था, इसके परिणामस्वरूप देश में उभरी जनधारणा के चलते आंदोलन हुए और देश के कुछ हिस्सों में हिंसा भी हुई. लेकिन आप ने इस पर भी चर्चा नहीं की.मैं इस बात पर गौर करके दुखी हूं कि इस महत्वपूर्ण संसदीय संस्थान और इसकी जिम्मेदारियों के जनादेश के प्रति असम्मान और गंवाये गये अवसरों के कारण यह सत्र व्यर्थ चला गया.’
साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि ‘आपके पास दूसरी प्राथमिकताएं है और इस पर चर्चा का समय नहीं था.तमिलनाडु एवं आंध्र प्रदेश के सदस्य अपने राज्यों से जुड़े कुछ मुद्दों पर चर्चा करना चाहते थे, लेकिन इन मुद्दों पर भी चर्चा नहीं हो सकी.’

वेंकैया नायडू ने उच्च सदन के महत्व के बारे में राज्यसभा के पहले सभापति सर्वपल्ली राधाकृष्णन एवं प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के वक्तव्यों का उल्लेख करते हुए कहा ‘इस लंबे सत्र के अंत में हमारे देश के लोगों की चिंताओं को संबोधित करने और उनकी वास्तविक आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में हमारा क्या योगदान रहा ये बताने के लिए हमारे पास कुछ भी नहीं है. इसके परिणामस्वरूप हम सब गंवाने वाले हैं. इनमें विपक्ष, सत्तापक्ष, सरकार तथा सबसे महत्वपूर्ण जनता एवं राष्ट्र शामिल हैं, आप सबको यह विचार करने की जरूरत है कि हम सब मिल कर सभी पक्षों के लिए गंवा देने वाली स्थिति में कैसे पहुंच गए? जबकि हम एक अच्छी परिस्थिति में पहुंच सकते थे. अब जागने और आगे बढ़ने का समय आ गया है.’

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक फरवरी को वित्तीय वर्ष 2018-19 का आम बजट पेश किया था. इसमें रेल बजट भी शामिल था. बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान उच्च सदन में लगभग 60 सदस्यों का कार्यकाल पूरा हुआ और उन्हें सदन में विदाई दी गई. सत्र के दौरान विभिन्न राज्यों से 58 सदस्य निर्वाचित होकर आए इनमें केन्द्रीय मंत्रियों जेटली, रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, धर्मेन्द्र प्रधान, थावरचंद गहलोत, सपा की जया बच्चन, राकांपा की वंदना चह्वाण शामिल हैं.

होती रही नारेबाजी
सत्र के दूसरे चरण में पीएनबी बैंक घोटाला, आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग तथा कावेरी जल विवाद सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के सदस्य नारेबाजी करते रहे. हंगामे के कारण एक भी दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सका. आपको बता दें कि कल सदन स्थगित होने के बाद भी तेदेपा के सदस्य आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर करीब पांच घंटे धरने पर बैठे रहे. बाद में उन्हें मार्शल के जरिये सदन से बाहर करवाया गया.

भ्रष्टाचार निवारण संशोधन नहीं हो सका पारित
सदन में हुए लगातार हंगामे की वजह भ्रष्टाचार निवारण संशोधन विधेयक पर भी मतविभाजन नहीं होने से सरकार इसे पारित कराने में नाकाम रही. इस विधेयक पर सदन की प्रवर समिति पहले ही अपनी रिपोर्ट पेश कर चुकी थी.

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