क्या देश में रोहिंग्याओं को मिलेगी इजाजत, सुप्रीम कोर्ट आज सुना सकता है फैसला

रोहिंग्या मुसलमानों को वापस म्यांमार भेजने के केंद्र के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ सकता है. इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्र करेंगे.

नई दिल्ली: रोहिंग्या मुसलमानों को वापस म्यांमार भेजने के केंद्र के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ सकता है. इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्र करेंगे. रोहिंग्या शरणार्थियों के निर्वासन को रोकने की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं की भूमिका पर केंद्र ने सवाल उठाए हैं. सरकार ने इन याचिकाओं को देश की जनसांख्यिकी और उसकी स्थिरता के लिए खतरा बताया है. जानकारी के अनुसार, वकील तुषार मेहता फैसले को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोर्ट में केंद्र का प्रतिनिधित्व करेंगे.

केंद्र सरकार ने पिछले साल अगस्त में भारत में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं को वापस भेजने का निर्णय लिया था. उन्होंने इन शरणार्थियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया था. म्यांमार के रखाइन में हुई हिंसा के बाद वहां से भागकर आए रोहिंग्या शरणार्थी जम्मू, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान में रह रहे हैं.

देश को शरणार्थियों की राजधानी नहीं बनने देंगे
सरकार ने अपने हलफनामे में रोहिंग्या शरणार्थियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कहा है कि ये भारत में नहीं रह सकते. सरकार ने कहा है कि उसे खुफिया जानकारी मिली है कि कुछ रोहिंग्या आतंकी संगठनों के प्रभाव में हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में दलीलें भावनात्मक पहलुओं पर नहीं, बल्कि कानूनी बिंदुओं पर आधारित होनी चाहिए. केंद्र ने कहा है कि देशभर में 40 हजार से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी मौजूद हैं. अब तक करीब 9 लाख रोहिंग्या म्यांमार छोड़ चुके हैं. केंद्र सरकार ने कोर्ट में यह भी कहा था कि सरकार इस समस्या के समाधान के लिए राजनयिक प्रयास कर रही है, इसलिए कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए. केंद्र ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि वे देश को शरणार्थियों की राजधानी नहीं बनने देंगे.

क्या है म्यांमार रोहिंग्या मामला
रोहिंग्या समुदाय 12वीं सदी के शुरुआती दशक में म्यांमार के रखाइन इलाके में आकर बस तो गया, लेकिन स्थानीय बौद्ध बहुसंख्यक समुदाय ने उन्हें आज तक नहीं अपनाया है. 2012 में रखाइन में कुछ सुरक्षाकर्मियों की हत्या के बाद रोहिंग्या और सुरक्षाकर्मियों के बीच व्यापक हिंसा भड़क गई. तब से म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हिंसा जारी है. रोहिंग्या और म्यांमार के सुरक्षा बल एक-दूसरे पर अत्याचार करने का आरोप लगा रहे हैं. पिछले साल एक बार फिर हिंसा तब शुरू हुई जब रोहिंग्या मुसलमानों ने पुलिस पर हमला कर दिया. इस लड़ाई में कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जिसके बाद बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमान मारे गए. इस हिंसा के बाद से म्यांमार में हालात और भी खराब हो गए. लाखों की संख्या में रोहिंग्या सीमा पार कर बांग्लादेश पहुंचने लगे और हजारों शरणार्थी भारत आ गए.

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