धनबाद : कोयले की खदान धंसी, 100 वर्ग फीट के दायरे में धंसी जमीन,चौड़ी-चौड़ी दरारें पड़ीं, कई के दबने की आशंका

निरसा के कालूबथान क्षेत्र में केथारडीह जंगल में कोयले की अवैध खदान सोमवार को धंस गई। जोरदार आवाज के साथ जमीन फटी। सौ वर्गफीट क्षेत्र में चौड़ी दरार पड़ गई है। अवैध खनन करने वाले कई मजदूरों के दबने की आशंका जताई जा रही है मगर इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। घटना के बाद से केथारडीह और आसपास की बस्ती में दहशत का माहौल है। कालूबथान पुलिस का कहना है कि किसी के दबने की पुष्टि नहीं हुई है। बीसीसीएल सीवी एरिया की सीआईएसएफ टीम भी घटनास्थल पर पहुंची।

घटना स्थल के पास काफी पहले भूमिगत कोयला खनन बीसीसीएल की ओर से किया गया था। इसके बाद खदान को बंद कर दिया गया। अवैध खनन करने वालों ने बंद खदान में कई मुहाने खोल दिए और कोयले की खुदाई शुरू कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से अवैध खनन हो रहा है। केथारडीह और आसपास की बस्ती के दर्जनों की संख्या में लोग कोयला खनन करने के लिए खदान में जाते थे। सोमवार को भी गए थे। इसलिए खदान धंसने से लोग दबे होंगे। बारिश के कारण अवैध खनन के कारण खदान में मौजूद कई पिलर कमजोर हो गए थे। कमजोर पिलर धराशायी होने से जमीन दब गई।

गांव की खामोशी कुछ कहती है : केथारडीह गांव में खामोशी है। यह संकेत है कि धंसान में कई जानें गई हैं। अवैध खनन में मौत को दबाने की पुरानी आदत है। पुलिस की भी कोशिश होती है कि मामला दबा रहे। जिनके लोग मरते हैं वे भी पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए मौतों छिपा जाते हैं। केथारडीह के ही एक ग्रामीण ने कहा कि हर रोज खुदाई करने लोग खदान में जाते थे। इसलिए कुछ तो हुआ ही है। बीसीसीएल ने मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि अवैध खनन कंपनी की जिम्मेदारी नहीं है। यह कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है।

खदान की जमीन धंसी है, लेकिन किसी की जान नहीं गई है। पुलिस अवैध खनन को लेकर शुरू से गंभीर है। इस क्षेत्र में कई बार छापेमारी एवं कार्रवाई हुई है। सोमवार को घटी घटना में किसी के दबे होने की पुष्टि नहीं हुई है।

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