पश्चिम बंगाल: नामांकन दाखिल करने के दौरान TMC, बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प, 6 पुलिसकर्मी घायल

पुलिस ने बताया कि पंचायत चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए सोमवार आखिरी दिन था.

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में अगले महीने होने वाले पंचायत चुनाव के लिए दक्षिण 24 परगना जिले के उस्ती में नामांकन दाखिल करने के दौरान बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प में छह पुलिसकर्मी घायल हो गए. पुलिस ने बताया कि पंचायत चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए सोमवार आखिरी दिन था. पंचायत चुनाव एक, तीन और पांच मई को होना है. इससे पहले दिन में सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तिथि बढ़ाने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप हो सकता है.

न्यायालय ने यद्यपि सभी उम्मीदवारों को छूट दी कि वे राहत के लिए पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग से सम्पर्क कर सकते हैं. बीजेपी ने गत छह मार्च को सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हत्या हो रही है क्योंकि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस बड़े पैमाने पर हिंसा में लिप्त है और उसके उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव के लिए नामांकन दाखिल नहीं करने दे रही है.

तृणमूल कांग्रेस ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने यद्यपि कहा, ‘‘यदि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता मतदान वाले दिन हिंसा फैलाने की कोशिश करते हैं तो इसका उन्हीं के अंदाज में जवाब दिया जाएगा . यदि वे हम पर बम और पिस्तौल से हमले करते हैं तो हम मिठाइयों की प्लेट से उनका अभिनंदन नहीं करेंगे .’’ बीजेपी , माकपा और कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकर्ताओं पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बैरूपुर, डायमंड हार्बर और भांगर सभी दक्षिण 24 परगना जिले में हमला किया.

राजभवन एक राजनीतिक पार्टी की इकाई के रूप में काम कर रहा है: टीएमसी
इससे पहले बीते 4 अप्रैल को तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि राजभवन ‘‘एक राजनीतिक पार्टी की एक इकाई के रूप में’’ काम कर रहा है. तृणमूल कांग्रेस का आरोप था कि विपक्षी उम्मीदवार पश्चिम बंगाल में अगले महीने होने वाले पंचायत चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने से सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं को रोक रहे है.

टीएमसी के महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा था, ‘‘जिस तरह से राज भवन एकतरफा सूचनाओं पर दूसरों के विचारों को ध्यान में रखे बिना एकतरफा ढंग से काम कर रहा है, ऐसा लगता है कि यह एक राजनीतिक दल की इकाई के रूप में काम कर रहा है.’’ हालांकि, राज्यपाल के एन त्रिपाठी ने कहा, ‘‘राज्यपाल राज्य के लोगों का संरक्षक होता है और वह राज्य में घटित चीजों पर संज्ञान ले सकते है.’’

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