कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार को कोई खतरा नहीं, राम माधव ने कहा

जम्मू: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के महासचिव राम माधव ने शनिवार (14 अप्रैल) को कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में सत्तारूढ़ पीडीपी-भाजपा गठबंधन को कोई खतरा नहीं है, क्योंकि दोनों दल समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं. वह यहां शनिवार (14 अप्रैल) तड़के भाजपा विधायक दल की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए पार्टी मुख्यालय पहुंचे हैं. जम्मू एवं कश्मीर के भाजपा प्रभारी माधव ने कहा, “हम हमारी पार्टी के विधायकों और इस्तीफा देने वाले दोनों मंत्रियों से बात करेंगे.” उन्होंने कहा, “राज्य में हाल ही में हुए राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर विचार-विमर्श किया जाएगा और चीजों पर चर्चा की जाएगी.”

इस बीच, श्रीनगर में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती कठुआ में हुए आठ साल की नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म व हत्या मामले में अगले कदम पर चर्चा के लिए पार्टी विधायकों और वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक कर रही हैं. जानकार सूत्रों ने कहा कि महबूबा इस मामले में जल्द से जल्द सजा के लिए जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय से एक त्वरित अदालत के गठन का अनुरोध कर सकती हैं. मुख्यमंत्री ने हाल ही में आरोपी पुलिस अधिकारियों के बर्खास्त करने की भी घोषणा की थी, जिनके खिलाफ आरोप-पत्र दायर हो चुका है.

उल्लेखनीय है कि खानाबदोश बकरवाल मुस्लिम समुदाय की एक बच्ची 10 जनवरी को अपने घर के पास से लापता हो गई थी और एक सप्ताह बाद उसका शव उसी इलाके में मिला था. गांव के ही एक मंदिर में एक सप्ताह तक उसके साथ कथित तौर पर छह लोगों ने बलात्कार किया. पीड़िता की हत्या करने से पहले नशीला पदार्थ देकर उसके साथ कई बार बलात्कार किया गया था. इस घटना के बाद से संपूर्ण भारत में रोष देखने को मिला.

रैली में स्थिति को शांत करने के लिए शामिल हुए – भाजपा नेता चौधरी लाल सिंह
वहीं दूसरी ओर कठुआ में एक बच्ची के साथ बलात्कार एवं हत्या के मामले के आरोपियों के समर्थन में निकाली गई रैली में शामिल होने के अपने कदम का बचाव करते हुए भाजपा नेता चौधरी लाल सिंह ने शनिवार (14 अप्रैल) को कहा कि ऐसा मौजूदा स्थिति को शांत करने और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए किया गया.

जम्मू-कश्मीर की गठबंधन सरकार में शामिल भाजपा नेता सिंह और चंदर प्रकाश गंगा ने मामले में 13 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था. चौधरी ने कहा, ‘‘करीब 15 दिन पहले प्रवास के कारण उत्पन्न हुई स्थिति का शांत करने के लिए यह कदम उठाया गया. हमने उनसे कहा कि उन्हें वापस जाना चाहिए. अब्दुल गनी कोहली (मंत्री) को पीड़िता के घर भेजा गया था, ताकि वहां अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो.’’

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