बाबासाहेब आंबेडकर के बारे वो सबकुछ जो आप पढ़ना चाहते हैं

4 अप्रैल को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है. इस विशेष अवसर पर आज देशभर में कार्यक्रम हो रहे हैं. कबीरपंथी परिवार में जन्मे डॉ. भीमराव आंबेडकर अपनी 127वीं जयंती के मौके पर भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितना संविधान के निर्माण के बाद और दलितों के संघर्ष के दौरान थे. विलक्षण प्रतिभा के धनी भीमराव बेहद निर्भीक थे. वे न चुनौतियों से डरते थे, न झुकते थे.

नई दिल्ली: 14 अप्रैल को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है. इस विशेष अवसर पर आज देशभर में कार्यक्रम हो रहे हैं. कबीरपंथी परिवार में जन्मे डॉ. भीमराव आंबेडकर अपनी 127वीं जयंती के मौके पर भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितना संविधान के निर्माण के बाद और दलितों के संघर्ष के दौरान थे. विलक्षण प्रतिभा के धनी भीमराव बेहद निर्भीक थे. वे न चुनौतियों से डरते थे, न झुकते थे. लड़ाकू और हठी आंबेडकर ने अन्याय के आगे झुकना तो जैसे सीखा ही न था. जीवन के सभी संघर्षों से लड़ते हुए वे आजाद भारत के संविधान निर्माण के वक्त उसकी प्रारूप समिति के अध्यक्ष बनें और अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए वे ‘संविधान निर्माता’ कहलाए. आज उनकी जयंती पर जानिए उनके बारे में और कैसे देश में मनाई गई आंबेडकर जयंती.

महान दलित चिंतक आंबेडकर भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं. आंबेडकर ने उस दौर में भी भारतीय समाज और संस्कृति का अध्ययन कर ऐसी बातें कही थी जो आज के जीवन में भी सटीक बैठती हैं. जीवन में बदलाव ला सकती हैं, बाबा साहेब आंबेडकर की ये बातें

देश में दलित उत्पीड़न कानून में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से किए गए संशोधनों पर न सिर्फ बहस बल्कि उग्र आंदोलन चल रहे हैं. पहले विपक्ष और बाद में सत्ता पक्ष दोनों की ही राय है कि दलित उत्पीड़न कानून में से तत्काल गिरफ्तारी वाला प्रावधान लचीला किया जाना, दलित हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा. इस फैसले के बाद दलित चिंतकों की तरफ से न्याय पालिका में आरक्षण की मांग भी उठाई जाने लगी है. अगर आज डॉ. आंबेडकर होते तो दलित उत्पीड़न कानून में बदलाव पर क्या कहते

आंबेडकर के नाम पर कसमें खाई जाती हैं, आंदोलन किए जाते हैं और यह संदेश देने की पुरजोर कोशिशें की जाती हैं कि दलितों का सबसे बड़ा सिपहसालार कौन है. लेकिन यह भी हकीकत है कि राजनीति के मौजूदा बदले हुए तेवर में अगर वाकई कोई पीछे छूटता जा रहा है तो वह है सिर्फ और सिर्फ भीमराव आंबेडकर. आंबेडकर जंयती : बाबा साहेब ने नहीं सीखा था अन्याय के आगे झुकना

दुख की बात ये है कि हम आंबेडकर के साथ आज भी पूरा न्याय नहीं कर पाए हैं. बहुमुखी प्रतिभा और ज्ञान के धनी आंबेडकर को हम सामान्य रूप से ‘दलितों के मसीहा’ या ‘सामाजिक न्याय के पुरोधा’ के रूप में ही संबोधित करते हैं. यह उनके साथ आज तक हुई सबसे बड़ी नाइंसाफी है, जिसकी ज़िम्मेदार मूल रूप से हमारी शिक्षा-व्यवस्था और स्वतंत्रता के बाद की सरकारें एवं इतिहासकार हैं जिन्होंने कई दशकों तक आंबेडकर को महज़ इन्हीं दोनों सांचों में डाल कर उनको पूरे देश के समक्ष प्रस्तुत किया. आंबेडकर को मात्र ‘दलित-नेता’ कहना उनके साथ सबसे बड़ा अन्याय

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आंबेडकर महासभा ‘दलित मित्र’ सम्मान देगी. बाबा साहब भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती पर उनका ये सम्मान किया जाएगा. आंबेडकर जयंती: सीएम योगी को मिलेगा ‘दलित मित्र’ सम्मान

पूरा देश संविधाननिर्माता बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की आज 127वीं जयंती मना रहा है. डॉ. भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल सन् 1891 में मध्यप्रदेश के महू में हुआ था. देशभर में आंबेडकर प्रतिमाएं क्षतिग्रस्त किए जाने की हाल की कई घटनाओं के मद्देनजर इस बार आंबेडकर जयंती के मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की 127वीं जयंती आज, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

आंबेडकर जयंती के मौके पर देशभर में संविधान निर्माता बाबा साहेब आबंडेकर को याद किया जा रहा है. गुजरात के अहमदाबाद में आंबेडकर को याद करने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया. इस कार्यक्रम के दौरान निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी के समर्थक और बीजेपी नेताओं के बीच झड़प हो गई. इस दौरान काफी हंगामा भी हुआ. आंबेडकर की मूर्ति पर बीजेपी नेताओं को माला चढ़ाने से मेवाणी समर्थकों ने रोका, बरपा हंगामा

127वीं आंबेडकर जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजापुर पहुंचे. बीजापुर में पीएम मोदी ने केंद्र सरकार की वन धन योजना का शुभारंभ किया. योजना का शुभारंभ करने के बाद पीएम मोदी ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित किया. आंबेडकर जयंती पर PM मोदी ने बीजापुर को दिया वन धन योजना का तोहफा, 10 खास बातें

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