अमेरिका की अगुवाई में सीरिया के सभी सैन्य ठिकानों पर हमले, पेंटागन ने कहा

वॉशिंगटन: अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि अमेरिका के नेतृत्व में संयुक्त कार्रवाई के तहत सीरिया के सभी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए गए. पेंटागन की प्रवक्ता डाना व्हाइट और अमेरिकी नौसेना के लेफ्टिनेंट जनरल कीनीथ एफ. मैक्केनजी जूनियर ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की शनिवार (14 अप्रैल) तड़के की संयुक्त कार्रवाई के बारे में जानकारी दी. व्हाइट ने कहा, “यह अभियान पूरी तरह से व्यवस्थित था. हमने सफलतापूर्व सभी ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए.”

व्हाइट ने कहा, “इस ऑपरेशन अमेरिकी नीति में बदलाव की वजह से नहीं हुआ है और न ही इसका उद्देश्य सीरियाई सरकार का सत्ता से उखाड़ फेंकना है बल्कि यह हवाई हमले सीरियाई सरकार द्वारा अपने ही लोगों पर रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के खिलाफ उठाया गया न्यायोचित, वैध और उपयुक्त जवाब है.” अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के साथ संयुक्त कार्रवाई कर सीरिया पर मिसाइल हमला किया था. सीरिया के पूर्वी गोता के डौमा में हाल में कथित रूप से सीरिया द्वारा रसायनिक हथियारों के इस्तेमाल को लेकर अमेरिका ने पहले ही असद सरकार को चेतावनी दी थी. इस हमले में बच्चों सहित 75 लोग मारे गए थे.

सीरिया पर अमेरिकी हमले की निंदा के रूसी प्रस्ताव को संरा ने किया खारिज
वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने रूस के उस प्रस्ताव को भारी बहुमत से खारिज कर दिया है जिसमें उसने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा सीरिया पर किये गए ‘‘हमले’’ की निंदा की बात कही थी. इसके साथ ही सीरिया के रासायनिक हथियारों के ठिकानों को लक्षित कर किये जा रहे गठबंधन के हवाई हमलों को सुरक्षा परिषद का मत भी मिल गया है. रूस की तरफ से बुलाई गई इस आपात बैठक में हालांकि इस बात को लेकर निराशा भी व्यक्त की गई कि अंतरराष्ट्रीय संगठन की यह सबसे ताकतवर इकाई पिछले सात सालों से चले आ रहे सीरियाई संघर्ष से निपटने में नाकाम नजर आई है.

तीन पश्चिमी देशों के गठबंधन की सेनाओं द्वारा सीरिया में ‘‘हमले’’ और ‘‘आगे किसी तरह के बल के इस्तेमाल’’ की निंदा और इसे फौरन रोके जाने की मांग वाले प्रस्ताव को 15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद के सिर्फ दो देशों चीन और बोलीविया का साथ मिला. इसके विपरीत आठ देशों ने रूसी प्रस्ताव के खिलाफ मत दिया. इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, नीदरलैंड्स, स्वीडन, कुवैत, पोलैंड और आइवरी कोस्ट शामिल हैं. मतदान के दौरान चार देश – इथियोपिया, कजाखिस्तान, इक्वेटोरियल गिनी और पेरू – अनुपस्थित रहे.

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