विराट कोहली की टीम, ऑस्‍ट्रेलिया से पिंक के बजाय रेड बॉल से खेलने की क्‍यों कर रही है जिद?

publiclive.co.in[Edited byः रंजीत]

टीम इंडिया इस साल दिसंबर में ऑस्‍ट्रेलिया का दौरा करने वाली है. इस दौरान एडिलेट में दोनों टीमें दिन-रात(डे-नाइट) का टेस्‍ट मैच खेलेंगी. लेकिन इससे पहले ही दोनों देशों के बोर्ड इस मसले पर एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं. दरअसल वजह यह है कि क्रिकेट ऑस्‍ट्रेलिया(सीए) बोर्ड इस बात पर अड़ा है कि इस मैच में पिंक बॉल(गुलाबी गेंद) का इस्‍तेमाल किया जाएगा और भारतीय बोर्ड बीसीसीआई का कहना है कि इस जगह रेड बॉल(लाल गेंद) का इस्‍तेमाल किया जाए. अब सवाल उठता है कि आखिर विराट कोहली की टीम को पिंक बॉल से खेलने से परहेज क्‍यों है?

ऐतराज की वजह
आस्ट्रेलिया में 2015 से लगातार दिन-रात्रि टेस्ट मैचों का आयोजन किया जा रहा है. एडिलेड में अब तक तीन जबकि ब्रिस्बेन में एक दिन-रात्रि टेस्ट मैच आयोजित किया गया और आस्ट्रेलिया ने इन सभी में जीत दर्ज की. माना जा रहा है कि ऑस्‍ट्रेलियाई टीम पिंक बॉल के साथ खेलने में सहज है. इसलिए उसको इस बॉल के साथ लगातार जीत मिल रही है. भारत के लिए यह अपेक्षाकृ‍त नया प्रयोग है. दूसरी बार एडिलेड का मैदान भारत के लिए भाग्‍यशाली रहा है. इन वजहों से टीम इंडिया एडिलेट में किसी तरह के नए प्रयोग को आजमाने से हिचक रही है.

पिंक बॉल ही क्‍यों?
दिन-रात्रि टेस्‍ट मैचों के लिए बॉल की प्रसिद्ध निर्माता कंपनी कूकाबूरा ने पहले ऑप्टिक येलो और ब्राइट ऑरेंज कलर का प्रयोग किया लेकिन वे सफल नहीं हुए और पिंक बॉल पर आम सहमति बन गई. दरअसल ऑप्टिक येलो और ब्राइट ऑरेंज कलर की बॉल घास पर आसानी से दिखती थी और फील्‍डरों को ऊंचे कैच लेने में भी सुविधा होती थी लेकिन बल्‍लेबाजों का कहना था कि पिच के ब्राउन पैच पर इनका कलर मैच हो जाने के कारण उनको बॉल देखने में दिक्‍कत होती है. उसके बाद पिंक बॉल को आजमाने पर वांछित नतीजे मिले. उसके बाद नवंबर, 2015 में ऑस्‍ट्रेलिया और न्‍यूजीलैंड के बीच दुनिया में पहली बार आयोजित हुए दिन-रात टेस्‍ट में पिंक बॉल का इस्‍तेमाल किया गया. पूर्व ऑस्‍ट्रेलियाई कप्‍तान स्‍टीव स्मिथ की सलाह पर पिंक बॉल के साथ ब्‍लैक कलर की सीम का इस्‍तेमाल किया गया. उन्‍होंने सलाह दी थी कि इसकी सीम गहरे हरे या सफेद रंग की तुलना में काले रंग की होने के कारण ज्‍यादा दिखाई देगी.

खासियत
लाल, सफेद और पिंक कलर की बॉल कॉर्क, रबर जैसे तत्‍वों से बनी होती है. लगभग समान उत्‍पादन तकनीकों से इसे बनाया जाता है. लेकिन डाई के कलर और ‘फिनिशिंग’ से यह तय होता है कि किस रंग की बॉल किस फार्मेट में इस्‍तेमाल की जाएगी. परंपरागत लाल रंग की टेस्‍ट बॉल को ग्रीस में डुबोया जाता है ताकि पानी इसके लेदर में घुस नहीं सके. लेकिन दिन-रात पिंक बॉल टेस्‍ट मैच में इसका इस्‍तेमाल नहीं किया जा सकता क्‍योंकि ग्रीस, पिंक कलर की चमक को फीका कर देगा और इस कारण बॉल को देखने में दिक्‍कत आएगी. इसके अलावा पिंक बॉल में पिंक कलर की घनी कोटिंग का स्‍प्रे भी होता है ताकि बॉल पूरी रात चमकती रहे.

BCCI और CA आमने-सामने
इस बीच क्रिकेट आस्ट्रेलिया (सीए) के सीईओ जेम्स सदरलैंड ने कहा है कि भारत इस साल के आखिर में होने वाली टेस्ट सीरीज के दौरान दिन-रात्रि टेस्ट मैच में खेलने से इसलिए मना कर रहा है क्योंकि वह हर हाल में ऑस्‍ट्रेलियाई सरजमीं पर जीत दर्ज करना चाहता है जबकि बीसीसीआई इस प्रस्तावित मैच को नामंजूर करने पर अडिग है. सदरलैंड को लगता है कि भारत के खिलाफ छह से दस दिसंबर के बीच एडिलेड में गुलाबी गेंद से मैच के आयोजन का फैसला करना सीए का विशेषाधिकार है लेकिन बीसीसीआई की प्रशासकों की समिति के प्रमुख विनोद राय ने फिर से स्पष्ट किया है कि दिन-रात्रि टेस्ट मैच नहीं होगा. सदरलैंड ने एसईएन रेडियो से कहा, ‘‘मेरी निजी राय है कि मेजबान देश को मैचों का कार्यक्रम तय करने का अधिकार होना चाहिए और वह जिस समय चाहे तब इन मैचों की शुरुआत कर सकता है.’’

इस संबंध में जब पीटीआई ने बीसीसीआई सीओए प्रमुख राय से संपर्क किया, उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि बीसीसीआई का रवैया बदलेगा क्योंकि हम पहले ही तय कर चुके हैं कि दिन-रात्रि गुलाबी गेंद के मैच प्रथम श्रेणी स्तर पर होते रहेंगे. दलीप ट्राफी फिर से दूधिया रोशनी में खेली जाएगी.’’ राय ने हालांकि कहा कि भारत के मना करने को यह नहीं माना जाना चाहिए कि दोनों बोर्ड इसको लेकर टकराव की स्थिति में है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसे टकराव का कारण नहीं मानता. खेल की परिस्थितियों पर दोनों बोर्ड को मिलकर फैसला करना होता है. जो भी होगा उस पर आपसी सहमति होगी. लेकिन मैं फिर से साफ कर दूं कि भारत गुलाबी गेंद वाले टेस्ट मैच में नहीं खेलेगा.’’ सदरलैंड ने यहां तक कहा कि भारत खेल के भविष्य के बजाय केवल सीरीज जीतने पर ध्यान दे रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘भारत भले ही इस दौरे में इस विचार को स्वीकार नहीं करे लेकिन मेरा मानना है कि यह भविष्य है. मुझे लगता है कि विश्व क्रिकेट में हर कोई इसे समझता है.’’

सदरलैंड ने कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो मुझे लगता है कि वे यहां आकर हमें हराना चाहते हैं. सच्चाई यह है कि आस्ट्रेलिया ने अब तक अपनी सरजमीं पर दूधिया रोशनी में खेले गये सभी मैच जीते हैं और लोगों को लगता है कि इससे हम थोड़े फायदे की स्थिति में रहेंगे.’’ बीसीसीआई के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि जीत को लक्ष्य बनाने में कोई बुराई नहीं है.उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित तौर पर हम आस्ट्रेलिया को उसकी सरजमीं पर हराना चाहते हैं. इसमें क्या गलत है. अगर वे हमें आसानी से हराने की रणनीति बना सकते हैं तो हमें अपने हितों का ध्यान रखना होगा. बीसीसीआई कभी गुलाबी कूकाबुरा गेंद को लेकर आश्वस्त नहीं रहा.’’ ऑस्‍ट्रेलिया के अपने दौरे में भारत तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय, चार टेस्ट और तीन वनडे मैच खेलेगा.

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