रमजान के दौरान संघर्ष विराम की महबूबा की मांग का बीजेपी ने किया विरोध

publiclive,co.in[Edited by रंजीत]

जम्मू: भारतीय जनता पार्टी की जम्मू कश्मीर इकाई ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की रमजान के महीनो में अमरनाथ यात्रा पूरी होने तक एक तरफा संघर्ष विराम की मांग का विरोध करते हुए दावा किया कि ऐसा कदम ‘राष्ट्रीय हित’ में बिल्कुल नही है. बीजेपी की राज्य इकाई ने कहा कि सेना की कार्रवाई से आतंकवादियों के हौसले पस्त हुए हैं और एकतरफा संघर्ष विराम उन पर पड़े दबाव को न केवल कम करेगा बल्कि उन्हें फिर से उत्साहित करेगा .

बीजेपी की प्रदेश इकाई के प्रवक्ता सुनील सेठी ने बुधवार की सर्वदलीय बैठक का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की घोषणा की तर्ज पर चर्चा के दौरान एकतरफा संघर्ष विराम की राय निकल कर सामने आई . उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है ……. मौजूदा परिस्थिति में एकतरफा संघर्ष विराम राष्ट्रीय हित में नहीं है. ’ सेठी ने कहा कि घाटी में आतंकियों का नेतृत्व सेना के प्रयासों के कारण दबाव में है . उन्होंने कहा, ‘रोजाना उन्हें बड़े पैमाने पर क्षति हो रही है. मौजूदा समय में वह दबाव में है .’

उमर ने रमजान संघर्षविराम प्रस्ताव पर महबूबा पर निशाना साधा
वहीं नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ‘बेशर्मी से सत्ता से चिपकी हुई हैं’ जबकि उनकी पार्टी के गठबंधन सहयोगी बीजेपी उनसे सहमत नहीं हैं.

उमर इन खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे कि बीजेपी इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं है कि केन्द्र को मई के मध्य में रमजान शुरू होने से लेकर अगस्त में अमरनाथ यात्रा संपन्न होने तक जम्मू कश्मीर में एकपक्षीय संघर्षविराम पर विचार करना चाहिए. बता दें मुख्यमंत्री ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक में इस प्रस्ताव की घोषणा की. महबूबा ने कहा था कि सभी दल इस बात पर सहमत हैं कि संघर्षविराम होना चाहिए.

उमर ने ट्विटर पर कहा, ‘कश्मीर में नई पहलों पर आम सहमति बनाने के लिए महबूबा मुफ्ती द्वारा सर्वदलीय बैठक बुलाने की क्या तुक थी जब सरकार में उनके सहयोगी उनसे सहमत नहीं हैं. फिर भी वह बेशर्मी से सत्ता से चिपकी हुई हैं क्योंकि उनके लिए यही मायने रखता है.’

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