PM मोदी के ‘अघोषित आपातकाल’ ने भारतीय राजनीति में डाला धीमा जहर : यशवंत सिन्हा

publiclive.co.in[Edited byः रंजीत]

पणजी: पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बुधवार (9 मई) को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाया गया आपातकाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘अघोषित आपातकाल’ से अलग था. उन्होंने कहा कि मोदी का ‘अघोषित आपातकाल’ भारतीय राजनीति में डाला गया धीमा जहर है. पणजी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सिन्हा ने राष्ट्रीय राजधानी के अकबर रोड को अज्ञात लोगों द्वारा अचानक महाराणा प्रताप रोड का नाम दिए जाने की निंदा की. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा ‘लुंपेन तत्वों’ को बढ़ावा किया किया जा रहा है.

सिन्हा ने कहा, “इंदिरा गांधी ने रातोंरात आपातकाल की घोषणा कर दी और विरोधियों को जेल में डाल दिया. आज का आपातकाल भय का माहौल है जोकि अघोषित रूप से बन गया है. ऐसा अचानक नहीं हुआ. इसलिए हमें पता नहीं चला. यह धीमा जहर है जो भारत की राजनीति में डाल दिया गया है.”

इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा और आम आदमी पार्टी के गोवा संयोजक एल्विस गोम्स भी मौजूद थे. यशवंत सिन्हा ने कहा, “दूसरा अंतर यह है कि इंदिरा गांधी का आपातकाल राजनीतिक फैसला था. यह उनकी कुर्सी बचाने के लिए उठाया गया एक राजनीतिक फैसला था. लेकिन, आज के आपातकाल में सांप्रदायिकता बेहद बड़ा तत्व है.”

सिसोदिया ने भाजपा नेताओं की तुलना मुगलों के साथ की
वहीं, दूसरी ओर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया ने बुधवार (9 मई) को केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के ‘घमंड और रवैये’ की तुलना मुगल शासकों से की. सिसोदिया ने कहा, “उन्हें (भाजपा) यह दिमाग में रखना चाहिए कि लालकिले में जो शासक बैठा करते थे, उन्हें लगता था कि उन्हें कोई हरा नहीं सकता और वे गरीबों का उत्पीड़न करने के बाद भी सत्ता में बने रहेंगे. उस समय भी कुछ लोग थे, जिन्होंने इन घमंडी शासकों के खिलाफ आवाज उठाई थी और अब इसी तरह के रवैये के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है.”

उन्होंने दिल्ली के कश्मीरी गेट आईएसबीटी पर महाराणा प्रताप की मूर्ति का अनावरण करने के बाद कहा, “मुगलों के जैसे ही, केंद्र सरकार अहंकारी है और वह ऐसा रवैया अपनाती है, जिसमें लोगों के लिए सबकुछ वही तय करेंगे व लोगों को कुछ भी निर्णय लेने नहीं देंगे.” आप नेता ने कहा कि महाराणा प्रताप एक खास समुदाय या जाति से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन उनके वास्तविक वंशज वे हैं, जिनके पास गरीबों के विरुद्ध हो रहे किसी भी भेदभाव के खिलाफ सच बोलने का साहस है और न कि वे हैं, जो केवल अपने बारे में और अपने फायदे के बारे में सोचते हैं.

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