सिद्धारमैया का लिंगायत-वोक्कालिगा कार्ड हो गया फेल, BJP ने बटोरे वोट

Www.publiclive.co.in [Edited By  रविप्रकाश यादव]

कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और सिद्धारमैया राज्य के दो सबसे बड़े समुदाय वोक्कालिगा और लिंगायत के वोट खींचने में विफल रहे. कर्नाटक में वोक्कालिगा और लिंगायत कुल आबादी का लगभग 12 से 15 और 17 फीसदी क्रमश: हैं और इसी विफलता के चलते कांग्रेस को सत्ता से बाहर का रास्ता देखना पड़ा.

पहले से एंटीइन्कम्बेंसी झेल रहे सिद्धारमैया ने अपने कार्यकाल के दौरान बड़े वोट बैंक वाले वोक्कालिगा समुदाय से विवादों में जाना और फिर लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक दर्जा देने का दांव कांग्रेस की विफलता का सबसे बड़ा कारण बना.

लिंगायत के गढ़ चामुंडेश्वरी में सिद्धारमैया को जेडीएस के वोक्कालिगा नेता जीटी देवेगौड़ा के हाथों करारी शिकस्त मिली. सिद्धारमैया 36,000 से अधिक वोटों से चुनाव हार गए. इसके अलावा सिद्धारमैया सरकार के वे तीन वरिष्ठ मंत्री भी चुनाव हार गए जिन्होंने लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी.

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इनमें खनन और भूगर्भ मंत्री विनय कुलकर्णी (धारवाड़ ग्रामीण से), चिकित्सा शिक्षा मंत्री शरन प्रकाश पाटिल (सेदाम से) और उच्च शिक्षा मंत्री बासवराज रायरारड्डी (येलबुर्गा) बीजेपी के उम्मीदवारों से बड़े वोटों के अंतर से हार गए.

इनके अलावा उत्तर कर्नाटक में लिंगायत बाहुल विधानसभाओं के नतीजों से भी साफ है कि लिंगायत समुदाय को बांटने के सिद्धारमैया का मास्टरस्ट्रोक कांग्रेस पार्टी के विरोध में बदल गया और कांग्रेस को ज्यादातर सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा.

वहीं बीजेपी ने केन्द्रीय कर्नाटक, मुंबई कर्नाटक और हैदराबाद कर्नाटक क्षेत्रों में फायदा पहुंचा है. इन क्षेत्रों में कुल 124 विधानसभा सीटों में लिंगायत वोट बैंक निर्णायक भूमिका में है और सिद्धारमैया सरकार के रुख के चलते इन क्षेत्रों में लिंगायत वोट बीएस येदियुरप्पा के पक्ष में गया.

सेंट्रल कर्नाटक क्षेत्र

विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस को सेंट्रल कर्नाटक का अपना मजबूत गढ़ गंवाना पड़ा. इस क्षेत्र में कर्नाटक के टुमकुर, दावनगेरे, चित्रदुर्ग और शिमोगा जिले की विधानसभा सीटें शामिल हैं. इन चुनावों में इस क्षेत्र की 11 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली को 24 सीटें बीजेपी के नाम रही. वहीं जेडीएस को भी इस क्षेत्र में एक भी सीट पर जीत नहीं मिली.

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