सत्ता पाने के लिए ज्योतिषी के कहने पर येदियुरप्पा ने बदला था अपना नाम, ये थी वजह

publiclive.co.in[Edited by रंजीत]

नई दिल्‍ली: कर्नाटक की राजनीति को नई दिशा देने वाले बीएस येदियुरप्पा ने नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है. वह बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे. हालांकि, अभी अपनी कुर्सी बचाने के लिए उन्हें 15 दिन में बहुमत साबित करना है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने से उनकी राजनीति पर संकट बना हुआ है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि येदियुरप्पा ने सत्ता पाने के लिए अपना नाम तक बदल लिया था. वह एक ज्योतिषी के कहने पर.

येदियुरप्‍पा को धार्मिक माना जाता है. पूजा-पाठ में उनकी गहरी आस्‍था है. इस बार भी कर्नाटक चुनाव की वोटिंग से पहले उन्होंने पूजा की और उसके बाद ही वोट डालने निकले. इससे पहले भी उन्हें धार्मिक कार्यों में देखा गया. बताते हैं कि पूजा-पाठ के अलावा येदियुरप्पा को ज्योतिष पर भी बहुत भरोसा है. कोई भी कदम उठाने से पहले वह अक्सर अपने ज्योतिषी से सलाह लेते हैं.

2007 में बदल ली थी नाम की स्पेलिंग
बात 2007 की है, जब कर्नाटक में बीजेपी को अपनी पैंठ जमानी थी तो येदियुरप्पा ही वो चेहरा थे जिसमें पार्टी को आशा की किरण दिखाई दी. लेकिन, सफर आसान नहीं था. क्योंकि, लिंगायत फैक्टर होने के बावजूद येदियुरप्पा को आगे आने के लिए कई बड़े दिग्गजों को पीछे छोड़ना था. यही वो समय था जब एक ज्योतिषी के कहने पर बीएस येदियुरप्पा ने अपने नाम की स्पेलिंग बदल ली.

अंग्रेजी स्पेलिंग में किया बदलाव
पहले बीएस येदियुरप्पा अपने नाम को अंग्रेजी में Yediyurappa लिखते थे. लेकिन, ज्योतिषी के कहने पर उन्होंने अपनी स्पेलिंग से I शब्द को हटा दिया और इसे बदलकर Yeddyurappa किया. यानी स्पेलिंग में एक अतिरिक्‍त D जोड़ लिया. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने सीएम पद की दावेदारी मजबूत करने के लिए ज्‍योतिषी से ऐसा पूछा था.

राजनीति में आने से पहले नौकरी करते थे
27 फरवरी 1943 को लिंगायत परिवार में जन्मे येदियुरप्पा मांड्या जिले के बुकानाकेरे रहने वाले हैं. 1965 में येदियुरप्‍पा ने नौकरी शुरू की. सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट में उन्होंने बतौर फर्स्‍ट डिवीजन क्‍लर्क से शुरुआत की. हालांकि, कुछ समय बाद यहां से नौकरी छोड़ दी. इसके बाद शिकारीपुरा पर पहुंच कर राइस मिल में नौकरी की. यहां भी येदियुरप्पा ने बतौर क्‍लर्क के तौर पर ही नौकरी शुरू की.

मालिक की बेटी से की शादी
येदियुरप्‍पा ने पढ़ाई पूरी करने के बाद काम की तलाश शुरू की. एक दोस्त ने येदियुरप्‍पा की मुलाकात वीरभद्र शास्त्री से कराई. शास्त्री वही शख्स थे, जिनकी राइस मिल में येदियुरप्‍पा ने दूसरी नौकरी शुरु की. शास्त्री ने येदियुरप्‍पा को नौकरी पर रख लिया और काबिलियत देखते हुए उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया. वीरभद्र शास्त्री ने ही येदियुरप्‍पा की लग्न और मेहनत को देखते हुए अपनी बेटी मित्रा देवी से उनकी शादी करा दी. हालांकि, 2004 में मित्रा देवी की मृत्यु हो गई.

यहां से आया टर्निंग प्वाइंट
येदियुरप्‍पा की लाइफ का टर्निंग प्वाइंट उनकी शादी थी. शादी से पहले से ही येदियुरप्‍पा संघ से जुड़े थे. लेकिन, शादी के 2 बाद उन्हें राजनीति में आने का मौका मिला. टाइम्‍स ऑफ इंडिया के मुताबिक, जब येदियुरप्‍पा ने राजनीति में आने का फैसला किया तो मित्रा देवी के पिता वीरभद्र शास्त्री ने उन्हें सबसे ज्‍यादा प्रोत्‍साहित किया.

2018 में दूसरी बार बने मुख्यमंत्री
2008 में पहली बार येदियुरप्पा बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री चुनकर आए. लेकिन, 2011 में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्हें कुर्सी गंवानी पड़ी. भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे येदियुरप्पा को बीजेपी ने 2018 में फिर से मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया. लिंगायत फैक्टर के चलते येदियुरप्पा की नेतृत्व वाली बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर आई और उसे 104 सीटें मिलीं. लेकिन, यह बहुमत से अभी दूर है.

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