कर्नाटक में भाजपा की चुनौती से पार पाने के लिए कांग्रेस को 3 बार बदलनी पड़ी याचिका

publiclive.co.in [Edited By रंजीत]

नई दिल्ली : कर्नाटक के सियासी आसमान में अभी भी आशंकाओं का कोहरा छंटा नहीं है. 15 मई के बाद पैदा हुआ सवाल अब भी वहीं का वहीं है. राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ भले बीएस येदियुरप्पा ने ले ली हो, लेकिन सरकार किसकी बनेगी, इस बारे में फैसला शनिवार शाम 4 बजे होगा. चुनाव परिणाम पूरी तरह से घोषित होने से पहले ही कांग्रेस ने बड़ा दांव चलते हुए जेडीएस को समर्थन दे दिया. इसके साथ ही भाजपा सबसे ज्यादा सीटें पाकर भी पीछे रह गई. अब सरकार किसकी बनेगी, इसका जवाब शनिवार को मिलेगा. भाजपा बहुमत के आंकड़े से अभी 8 सीटें पीछे है.

जैसे ही राज्यपाल वजूभाई वाला ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया, कांग्रेस ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट में आधी रात के बाद शुरू हुई सुनवाई सुबह तक चली. अंतिम फैसले के लिए शुक्रवार का दिन तय हुआ. इसके बाद फैसला आया कि भाजपा शनिवार शाम 4 बजे अपना बहुमत साबित करे.

गोवा, मणिपुर में भाजपा से चोट खा चुकी कांग्रेस ने इस स्थिति से निपटने के लिए पहले ही तैयारी कर ली थी. उसने ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाने वाली याचिका पहले से ही तैयार कर ली थी. इतना ही नहीं, इसमें जब भी जरूरत हुई इसमें सुधार किया गया. कहा जा रहा है कि दायर की गई याचिका में तीन बार सुधार किया गया.

15 मई को जब वोटों की गिनती हो रही थी और दोपहर बाद जब स्थिति इस ओर इशारा कर रही थी, कि भाजपा अपने दम पर सरकार नहीं बना पाएगी. उसी समय कांग्रेस ने एक संभावित ड्राफ्ट तैयार कर लिया था. इसका कारण ये था कि कांग्रेस मणिपुर और गोवा की तरह यहां धोखा नहीं खाना चाहती थी. इसी को ध्यान में रखते हुए अभिषेक मनु सिंघवी के नेतृत्व वाली लीगल टीम ने सुप्रीम कोर्ट से राज्य की सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए न्योता देने की मांग करने वाली याचिका तैयार कर ली थी.

लेकिन नतीजे उल्टे आए. भाजपा यहां सबसे बड़ी पार्टी बन गई. अब कांग्रेस की लीगल टीम फिर से सक्रिय हुई. उसने अपनी याचिका में संशोधन करते हुए कोर्ट से कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को सरकार बनाने की इजाजत की मांग की और ड्राफ्ट दोबारा से तैयार किया. कांग्रेस मान रही थी कि राज्यपाल की ओर से उसे बुलाने में आनाकानी की जाएगी.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस की याचिका बुधवार शाम को फाइनल हुई. लेकिन दूसरी ओर कर्नाटक में राज्यपाल ने येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दे दिया. कांग्रेस की लीगल सेल की मुसीबतें बढ़ गईं. इसके बाद अभिषेक मनु सिंघवी ने अपने जूनियर्स को याचिका फिर से ड्राफ्ट करने को कहा.

अब याचिका राज्यपाल के फैसले को चुनौती देने के लिहाज से तैयार की गई. राज्यपाल ने चुनाव बाद कांग्रेस-जेडीएस के गठबंधन के पास पर्याप्त बहुमत होने की बजाय उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया गया था. इस तरह से कांग्रेस की टीम रात में याचिका पूरी कर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. रात के साढ़े दस बज गए. इसके बाद लीगल टीम कॉपी को लेकर जब तक कोर्ट पहुंची, सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे बंद हो चुके थे. कोर्ट के सिक्यॉरिटी गार्ड्स गेट खोलने से इनकार कर दिया. इसके बाद टीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के पास पहुंची और आखिकार 11 बजे लीगल टीम को कोर्ट में जाने की इजाजत मिली.

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