कर्नाटक: यदि येदियुरप्‍पा समर्थन की चिट्ठी की नहीं दे पाए तो क्‍या कर सकता है सुप्रीम कोर्ट?

publiclive.co.in[Edited by रंजीत]

कर्नाटक में मचे सियासी संग्राम के बीच 18 मई को सुबह 10:30 बजे इस मसले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होने जा रही है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बीएस येदियुरप्‍पा के मुख्‍यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह पर रोक नहीं लगाई थी लेकिन उसके अगले ही दिन यानी कि 18 मई को उस चिट्ठी को कोर्ट के समक्ष पेश करने को कहा, जिसके दम पर वह सरकार बनाने का दावा कर रहे थे और जिसके कारण राज्‍यपाल ने उनको सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया. लिहाजा अब सारा दारोमदार उस चिट्ठी पर टिका है. यहीं से सवाल उठता है कि यदि वह चिट्ठी नहीं दे पाए तो सुप्रीम कोर्ट के पास क्‍या विकल्‍प हैं? इस कड़ी में संभावित विकल्‍पों पर एक नजर:

– 222 सीटों में से बीजेपी 104 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है. सबसे बड़े दल के आधार पर राज्‍यपाल ने पार्टी को सरकार बनाने का पहला मौका दिया है और 15 दिनों में समर्थन देने की बात कही है. ऐसे में कोर्ट विधानसभा में शक्ति परीक्षण के दौरान किसी निष्पक्ष व्यक्ति को पर्यवेक्षक नियुक्त कर सकती है. ऐसा मई 2016 में उत्तराखंड मामले में किया गया था. शीर्ष अदालत ने तब विधायी एवं संसदीय मामलों (पीएसएलपीए) के प्रधान सचिव को 10 मई 2016 को उत्तराखंड विधानसभा में शक्ति परीक्षण की निगरानी के लिये निष्पक्ष व्यक्ति के तौर पर भेजा था. उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विधानसभा में विश्वास मत का प्रस्ताव पेश कर इसे हासिल किया था. अदालत ने समूची कार्यवाही की पर्यवेक्षक की निगरानी में वीडियोग्राफी कराने का भी निर्देश दिया था.

– विशेषज्ञों के मुताबिक कोर्ट, राज्यपाल से उपलब्‍ध सामग्री पर विचार करके इस बात का फैसला करने को कह सकती है कि कौन राज्य में स्थिर सरकार प्रदान करने की स्थिति में है. हालांकि विद्वानों का कहना है कि अदालत यह नहीं कह सकती है कि येदियुरप्पा को सरकार बनाने के राज्यपाल के निमंत्रण को रद्द किया जाता है. वह संभव नहीं है. ऐसा इसलिए क्‍योंकि शीर्ष अदालत विधायिका के काम में बहुत अधिक हस्तक्षेप नहीं कर सकती है.

– सुप्रीम कोर्ट सुनवाई शुरू भी कर सकता है या कर्नाटक सरकार और येदियुरप्पा को अपना जवाब दाखिल करने के लिये वक्त दे सकता है. अदालत उन्हें सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिये वक्त दे सकती है.

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