सचिन ने आज के दिन पिता के लिए किया था कुछ ऐसा, पूरे देश ने किया था सैल्यूट

publiclive.co.in[edited by विजय दुबे ]

नई दिल्ली: 23 मई 1999 का दिन सचिन तेंदुलकर की जिंदगी का बेहद खास दिन है. इसी दिन सचिन तेंदुलकर ने अपने वनडे करियर का 22वां शतक जड़ा था. यह सचिन तेंदुलकर के करियर का सबसे यादगार शतक था. इस शतक को जड़ने के बाद सचिन तेंदुलकर की आंखों में आंसू थे. सचिन ने अपने इस शतक को अपने पिता को समर्पित किया था. सचिन की बेहतरीन पारी के लिए पूरा देश उन्हें सलाम कर रहा था. स्टेडियम में लोग पोस्टर और बैनर लेकर आए थे, जिनपर लिखा था- हम तुम्हारे साथ हैं सचिन… भारत तुम्हारे साथ है सचिन…

23 मई 1999 वर्ल्ड कप में केन्या के खिलाफ सचिन तेंदुलकर ने नाबाद 140 रनों की पारी खेली थी. इस पारी में सचिन ने 101 गेंदों में 12 चौकों और तीन छक्‍कों के साथ140 रनों की पारी खेलकर भारत को 94 रनों से जीत दिलाई थी. सचिन तेंदुलकर की यह पारी इसलिए भी बेहद खास है, क्योंकि पिता की मौत के बाद चंद दिनों बाद ही सचिन ने यह यादगार पारी खेली थी.

दरअसल, 1999 में वर्ल्ड कप इंग्लैंड में खेला जा रहा था. भारत दक्षिण अफ्रीका से अपना पहला मैच हार चुका था. टीम इंडिया को अगला मैच जिंब्बावे से खेलना था. जिंब्बावे से हार का मतलब था कि भारत पिछड़ जाएगा. देश की उम्मीदें सचिन तेंदुलकर से बंधी हुई थी, लेकिन जिंब्बावे साथ मैच से पहले ही सचिन तेंदुलकर के घर से एक बेहद बुरी खबर आई.

खबर थी कि सचिन तेंदुलकर के पिता रमेश तेंदुलकर का निधन हो गया है. सचिन की पत्नी अंजलि ने खुद इंग्लैंड आकर उन्हें यह दुखद खबर सुनाई थी. यह खबर सुनते ही सचिन मुंबई के लिए रवाना हो गए. पिता की मौत की खबर से सचिन बुरी तरह से टूट गए थे. अब जिंब्बावे के साथ होने वाले मैच का हिस्सा सचिन नहीं थे और इस मैच में भारत को हार का सामना करना पड़ा था.

जिंब्बावे से हारने के बाद भारत पर वर्ल्ड कप से बाहर होने का खतरा मंडराने लगा था. इधर, भारत में सचिन अपने पिता की मौत से गहरे सदमे थे. सभी को यही लग रहा था कि शायद अब सचिन इस वर्ल्ड कप का हिस्सा नहीं बनेंगे. भारत का अगला मैच केन्या से होना था. अगर भारत इस मैच को हारता तो वह विश्व कप के सफर से बाहर हो जाता.

सचिन तेंदुलकर अभी भारत में ही थे, लेकिन अपने पिता के अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जिसके बाद उन्हें महान सचिन तेंदुलकर कहने से कोई इंकार नहीं कर सकता था. सचिन तेंदुलकर पिता के अंतिम संस्कार के बाद सीधे इंग्लैंड के लिए रवाना हो गए. उन्होंने केन्या के खिलाफ मैच खेला और इस मैच में शानदार शतक जड़कर भारत तो वर्ल्ड कप में बनाए रखा.

केन्या के खिलाफ शतक जड़ने के बाद सचिन तेंदुलकर ने आसमान की तरफ अपने बल्ले को दिखाया और अपने पिता को याद किया. सचिन की आंखें नम थी और उन्होंने अपने इस शतक को अपने पिता को समर्पित कर दिया. जिस वक्त सचिन ने अपना शतक पूरा किया ना सिर्फ उनकी आंखें नम थी, बल्कि दर्शकों की आंखों में भी आंसू आ गए थे.

पिता की मौत के बाद सचिन तेंदुलकर का देश के लिए खेलने ने उन्हें महान बना दिया. बता दें कि सचिन अपने कई इंटरव्यूज में इस बात का जिक्र कर चुके हैं कि उनकी मां ने ही उन्हें पिता की मौत के बाद इंग्लैंड जाकर वर्ल्ड कप खेलने के लिए प्रेरित किया था. इस मैच में भारत ने मैच में दो विकेट पर 329 रन का विशाल स्‍कोर बनाया और मैच 94 रन से जीता.

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