CLAT-2018: दोबारा परीक्षा कराने की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट सुना सकता है अहम फैसला

publiclive.co.in[Edited by रंजीत ]

नई दिल्ली : देश की सर्वोच्च अदालत में आज (24 मई) कॉम लॉ एंट्रेंस टेस्ट को दोबारा कराने की मांग वाली य़ाचिका पर सुनवाई कराने वाला है. बुधवार (23 मई) को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि याचिका की एक कॉपी NUALS, केंद्र सरकार और CLAT की कोर कमेटी को भेजी जाएगी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश के 6 हाई कोर्ट में यदि इसी तरह के मामले पहले आ चुके हैं, जिन पर फैसला भी सुनाया जा चुका है, तो पहले सभी की डिटेल्स को अच्छी तरह से देखा और परखा जाएगा.

क्या है पूरा मामला?
NUALS ने 2018 में कॉमन लॉ एंट्रेंस टेस्ट को 13 मई को आयोजित किया था. NUALS ने निजी कंपनी सिफी टेक्नोलॉजी लिमिटेड के साथ मिलकर इस परीक्षा को आयोजित किया था. परीक्षा में हर साल हजारों की संख्या में छात्र हिस्सा लेते हैं. इस बार कई परीक्षा केंद्रों पर छात्रों को तकनीकी गड़बड़ियों का सामना करना पड़ा, जिसके कारण उन्हें 5 से 30 मिनट का नुकसान हुआ. ऐसे में छात्रों ने अपनी याचिका में यह बात कही है कि CLAT 2018 की ऑनलाइन परीक्षा के दौरान उन्हें इलेक्ट्रॉनिक स्तर पर और ऑनलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

छात्रों ने क्या की थी शिकायत?
छात्रों की याचिका में परीक्षा के बीच में ही बिजली का गुल हो जाना, लॉग-इन सिस्टम का फेल हो जाना, बायोमीट्रिक वेरीफिकेशन का धीमा होना, ब्लैंक स्क्रीन, लॉग-इन करने में ज्यादा वक्त लगना, कंप्यूटर का बार-बार रीसेट होना, कंप्यूटर का हैंग होना, सर्वर का शटडाउन होना और एक सवाल हल करने के बाद दूसरे सवाल पर जाने में ज्यादा वक्त लगना जैसी समस्याएं शामिल थीं..

30 मिनट हुए थे बर्बाद
तकनीकि खामियों के चलते छात्रों को परीक्षा के दौरान औसतन 5 से 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ा था. CLAT की परीक्षा में 200 सवालों को सुलझाने के लिए 120 मिनट का वक्त मिलता है, ऐसे में छात्रों के लिए एक-एक मिनट कीमती है.

याचिका में क्या था?
याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कहा था कि इस तरह की प्रतिस्पर्धी और कठिन परीक्षा में समय किसी भी छात्र का भविष्य तय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. सिर्फ एक गलत जवाब या एक सवाल को ना सुलझाना परीक्षा में बैठे छात्र को भारी पड़ सकता है. उसकी रैंकिंग हजारों पायदान खिसक सकती है. याचिका में यह भी कहा गया है कि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

याचिका में और भी की गई शिकायत
तकनीकी समस्याओं के अलावा याचिकाकर्ता ने परीक्षा के दौरान सामने आई कुछ अन्य समस्याओं का भी उल्लेख किया है. जैसे कि परीक्षा केंद्रों का खराब इंफ्रास्ट्रक्चर, परीक्षा केंद्रों के लिए जिन स्टाफ्स को रखा गया था, उनसे पर्याप्त गाइडेंस नहीं मिल पाई और कई सेंटर्स पर परीक्षा के लिए अनुचित आचरण आदि जैसे मुद्दों को भी उठाया गया है.

क्या दोबारा होगी परीक्षा?
CLAT 2018 को लेकर यह पहली याचिका नहीं है. देश के विभिन्न उच्च न्यायलयों में CLAT 2018 में हुई अनियमितताओं को लेकर याचिका दायर की गई हैं. इसमें CLAT 2018 परीक्षा दोबारा कराए जाने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कल यानी गुरुवार को एक बार फिर करने वाला है.

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