अंकुरजीत की कहानी, जिन्होंने बगैर आंखों की रोशनी के सिविल सर्विस परीक्षा में हासिल की 414वीं रैंक

publiclive.co.in[Edited by विजय दुबे ]

नई दिल्ली: स्टीफन हॉकिंग के कहा है कि ” चाहे ज़िन्दगी कितनी भी कठिन लगे, आप हमेशा कुछ न कुछ कर सकते हैं और सफल हो सकते हैं”.ऐसी ही एक कहानी है अंकुरजीत की, जिन्होंने इस बार की सिविल सेवा परीक्षा में 414वीं रैंक हासिल की है. अंकुरजीत की आँखों की रोशनी नहीं है और उन्हें ये मुकाम केवल अपनी लगन, मेहनत और दृणनिश्चय की वजह से हासिल हुआ है. उन्होंने टेक्नोलॉजी की मदद से पढ़ाई की और सफलता हासिल की.अपनी डिसेबिलिटी को एबिलिटी में बदला . ये बाते पढ़ने में जितनी सरल लग रही है वह उतनी हैं नहीं. किसी ने कहा है की जब किसी पर मुसीबत आती है, तब या तो वो बिखर जाता है या निखर जाता है, तो अंकुरजीत उस मुसीबत में और निखर गए. बचपन से पढाई में काफी मेधावी थे अंकुरजीत पर उन्हें धीरे धीरे देखने में दिक्कत होने लगी और पढाई करने में काफी दिक्कत आने लगी. उन्होंने क्लास में ब्लैकबोर्ड भी नहीं दीखता था और वो केवल सुनकर चीज़ों को समझने की कोशिश करने लगे.

अंकुरजीत हरियाणा के यमुनानगर के पास एक छोटे से गांव रसूलपुर में पले बढे है और उनकी दसवीं तक की पढाई गांव के सरकारी स्कूल से ही हुई है. जब गर्मियों की छुट्टियों में बच्चे खेलते और मस्ती करते थे, अंकुरजीत माँ के मदद से सारी किताबे पहले ही पढ़ लेते थे, ताकि जब क्लास में टीचर पढ़ाये तब वह सुनकर ही सब कुछ समझ लें. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गयी वैसे वैसे उनकी देखने की क्षमता कम होती गयी. परन्तु पढ़ाई का शौक और कुछ बड़ा करने की चाहत कम होती रौशनी के साथ दिन पर दिन और तीव्र होती चली गयी.

दोस्तों, परिवार और खासतौर पर अपने शिक्षकों की बदौलत अंकुर वो हासिल कर पाए जो वो करना चाहते थे.पर इन के बीच अंकुरजीत कभी भी अपनी उस शिक्षिका को नहीं भूल पाएंगे जिन्होंने उन्हें उनके सुनहरे भविष्य के सपने दिखाए और सिर्फ मेहनत और कर्म करने की शिक्षा दी. NDTV से खास बातचीत में अंकुर बेहद रोमांचक किस्सा बताते हैं कि कैसे जब वो ग्यारवी कक्षा में थे तब उनके स्कूल में एक कोचिंग सेंटर वाले आये बच्चो को इंजीनियरिंग में करियर की सलाह देने के लिए. अंकुरजीत की शिक्षिका ने उन्होंने भी उस क्लास में जाने को कहा जहां इस बारे में बताया जा रहा था.ज़िन्दगी में पहली बार अंकुरजीत को JEE के एग्जाम के बारे ये भी समझ में आया कि ये बेहद मुश्किल परीक्षा है. वह चुपचाप सुनकर लौट आये. तब शिक्षिका ने पूछा कि क्या वो JEE का फॉर्म भरेंगे. तब अंकुरजीत ने ये कहकर मना कर दिया कि उन्हें नहीं लगता की वो उस परीक्षा में सफल हो पाएंगे और उनके पैसे बर्बाद हो जायेंगे. इस बात पर उन्हें उनकी टीचर ने पैसे दिए और कहा कि तुम मेरे वैसे बर्बाद कर दो पर एग्जाम जरूर दो. उन्होंने अंकुरजीत से कहा कि कोशिश हमेशा जरुरी है. भले ही उसका नतीजा कुछ भी आये. ये बात अंकुरजीत के दिल को छू गयी और वह उस परीक्षा में न सिर्फ सफल हुए बल्कि उन्हें आईआईटी रूड़की में एडमिशन मिल गया. जो देश का एक बेहद प्रतिष्ठित संस्थान है और यही से उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है.

टिप्पणियांआईआईटी ने उनके जीवन के सपनो को नयी उड़ान दी और उन्हें टेक्नोलॉजी के करीब ला दिया. जिससे उन्हें पढने में होनी वाली दिक्कतों का हल मिल गया. वो स्क्रीन रीडर की मदद से किताबे पढ़ने लगे और जब किसी चीज़ को समझने में दिक्कत आती तब दोस्त उनको उसका हल बता देते. दिन पर दिन अंकुरजीत के मन के अंदर के अंकुर को ज्ञान का माहौल मिला और जो सपना उन्होंने बचपन में देखा था एक आईएएस अफसर बनने का वो अब पास दिखने लगा. अंकुरजीत के साथ उनके तीन और दोस्त भी ये ही सपना देख रहे थे और कहते हैं न कि जब आप किसी चीज़ को शिद्दत से चाहते है तो पूरी कायनात आपको उससे मिलाने में लग जाती है, उसी तरह इन चारों दोस्तों ने एक साथ तैयारी की. इस बार सिविल सर्विस परीक्षा में सभी उत्तीर्ण हो गए.अंकुरजीत के अपने जीवन में कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा, क्यूंकि वो मानते थे कि जीत और हार आपकी सोच पर निर्भर करता है. मान लो तो हार होगी और ठान लो तो जीत होगी. इसलिए उन्होंने कभी अपनी परिस्थितियों पर तरस नहीं दिखाया बल्कि उसको हर बार चुनौती दी. जिसका नतीजा आज सबके सामने हैं. अंकुरजीत को ये सफलता उनके दूसरे प्रयास में मिली. उनके मन में सिविल सर्वेंट बनने का सपना तब पैदा हुआ था जब उन्होंने अपनी माँ से पूछा था जो कि महिला एवं बाल विकास विभाग में सुपरवाइजर हैं, सरकार की नीतियां कौन बनाता है और माँ के कहा था कि वो सिविल सर्वेंट होते हैं. बस तब से ये सपना दिल में पल रहा था की वो भी इस सिस्टम का हिस्सा बने और बदलाव लाये जिससे आज हकीकत के पंख मिले हैं.

अंकुरजीत का सफर एक छोटे से गांव से शुरू होकर आज सत्ता के गलियारों तक पहुंच गया है. जिसके पीछे निरंतर मेहनत है और हार न मानने की ज़िद और आँखो में ज्ञान की ज्योति.अंकुरजीत की कहानी हमें वही प्रेरणा देती हैं जो स्वामी विवेकानंद ने दी थी की “एक विचार लें. उस विचार को अपनी जिंदगी बना लें. उसके बारे में सोचिये, उसके सपने देखिये, उस विचार को जियें. आपका मन, आपकी मांसपेशियां, आपके शरीर का हर एक अंग, सभी उस विचार से भरपूर हो. और दूसरे सभी विचारों को छोड़ दें. यही सफ़लता का तरीका है.

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