क्या BJP में शामिल होने वाले हैं EX आर्मी चीफ दलबीर सिंह सुहाग?

publiclive.co.in {Edited By रवि यादव}

नई दिल्ली: क्या भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में एक और सेना प्रमुख शामिल होने वाले हैं? मीडिया में एक तस्वीर आने के बाद से यह सवाल उठ रहे हैं. इस तस्वीर में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और पूर्व सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग दिख रहे हैं. दरअसल, बीजेपी एक अभियान (संपर्क फॉर समर्थन) चला रही है, जिसके तहत पार्टी के बड़े नेता मोदी सरकार के चार साल के कामकाज की बातें देश के जानी-मानी हस्तियों से मिलकर उनसे साझा करना है. इसी कड़ी में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को पूर्व सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग से मुलाकात कर मोदी सरकार की 4 साल की उपलब्धियां बताईं.

इस दौरान अमित शाह और दलबीर सुहाग की जिस गर्मजोशी से मुलाकात हुई, उसके बाद से कई तरही अटकलें शुरू हो गईं. सवाल उठ रहे हैं कि क्या दलबीर सिंह सुहाग भी 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल होकर इसी पार्टी के टिकट पर भाग्य आजमा सकते हैं? हालांकि बीजेपी की ओर से इस संबंध में कहा गया है कि फिलहाल ऐसी कोई बात नहीं है. पार्टी नेताओं का कहना है कि यह एक केवल एक अभियान के तहत मुलाकात थी.

ANI

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BJP President Amit Shah met Former Army chief General Dalbir Singh at Singh’s residence in Delhi, from where Shah started the ‘Sampark for Samarthan’ initiative to let people know about the achievements of Central government in past 4 years.

इस वजह से शुरू हुई अटकलें

मालूम हो कि इस वक्त मोदी सरकार में विदेश राज्य मंत्री का पद पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह संभाल रहे हैं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि 31 मई 2012 को जनरल वीके सिंह सेना प्रमुख के पद से रिटायर हुए थे और साल 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर लिया था. इसके बाद गाजियाबाद सीट से सांसद बनने के बाद वे मोदी कैबिनेट का हिस्सा भी हैं.

मौजूदा वक्त में 2019 का लोकसभा चुनाव भी नजदीक है, इसी बीच अमित शाह और दलबीर सिंह सुहाग की मुलाकात के साथ ही अटकलें शुरू हो गई हैं.

मालूम हो कि दलबीर सिंह सुहाग मूल रूप से हरियाणा के हैं. उनका गांव दिल्ली से 65 किलोमीटर दूर झज्जर जिले में है. उनके पिता सेना में पैदल सिपाही थे. 1970 में एनसीसी में सलेक्ट होने के बाद दलबीर सिंह सुहाग आर्मी में आए और सेना में सर्वोच्च पद पर पहुंचकर 43 साल की नौकरी करने के बाद रिटायर हुए.

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