गौतम गंभीर बोले- डर लगता है अगर मेरी बेटियों ने मुझसे रेप का अर्थ पूछ लिया

publiclive.co.in[Edited by विजय दुबे]

नई दिल्ली : टीम इंडिया के क्रिकेटर गौतम गंभीर क्रिकेट के अलावा हमेशा दूसरे सामाजिक मुद्दों पर भी हमेशा मुखर रहते हैं. वह कई बार उन मुद्दों पर आगे बढ़कर बोलते हैं, जिन पर बात करने से आम तौर पर क्रिकेटर कतराते हैं. चाहे वह आतंकवाद का मामला हो, पाकिस्तान के साथ संबंधों की बात हो या फिर अब समाज में महिलाओं और बेटियों के प्रति बढ़ती हिंसा और अपराध की बात. उन्होंने अपने एक कॉलम के जरिए अब इस मुद्दे को छुआ है. उन्होंने देश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध पर अपनी चिंता जाहिर की है.

गौतम गंभीर ने इस मुद्दे पर बात रखते हुए कहा, मुझे कई बार डर लगता है कि अगर कभी मेरी बेटियों ने मुझसे रेप शब्द का अर्थ पूछ लिया. हिंदुस्तान टाइम्स में लिखे एक लेख के मुताबिक गौतम गंभीर बताते हैं मेरा रेप शब्द से सामना एक फिल्म इंसाफ का तराजू के जरिए हुआ. जब मैं 14 साल का था तब मुझे इस शब्द के बारे में पता चला. गंभीर ने कहा, 1980 में आई इस फिल्म से मैंने इस शब्द के बारे में जाना. ये फिल्म दो बहनों के बारे में थी. इस फिल्म में रेपिस्ट की भूमिका राज बब्बर ने निभाई थी.

गंभीर ने लिखा, आज बच्चों के साथ रेप की वारदातों की खबरें रोज सुनने और देखने में आती हैं. कई बार तो मुझे डर लगता है कि मेरी दोनों बेटियां कहीं इस शब्द का अर्थ न पूछने लगें. मेरी दो बेटियां हैं. इसमें एक 4 साल की है तो दूसरी 11 साल की. दो बेटियों का पिता होने पर मुझे खुशी और गर्व है, लेकिन कई बार मैं चिंतित भी होता हूं. उन्होंने कहा, हालांकि स्कूल में गुड और बैड टच के बारे में उन्हें बताया जाता है, लेकिन जिस तरह ये अपराध रोजाना हो रहे हैं, उसे देखकर विचलित भी हूं.

गंभीर ने अपनी बात रखते हुए नेशनल क्राइम ब्यूरो के आंकड़ों को भी सामने रखा. जो साफ दिखाते हैं कि देश में किस तरह से ये अपराध बढ़ते जा रहे हैं. पिछले 10 साल में बच्चों के प्रति होने वाले यौन अपराधों में 336 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. हाल की घटनाओं का उल्लेख करते हुए गंभीर ने लिखा, निठारी, इंदौर, कठुआ ओर उन्नाव जैसे मामलों ने हमें शर्मिंदा किया है. ऐसे अपराध करने वाले लोग आतंकियों से ज्यादा खतरनाक हैं.

सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
गौतम गंभीर ने लिखा कि रेपिस्ट को किसी और दूसरे कठोर शब्द से बुलाया जाना चाहिए. उन्होंने अभी हाल में केंद्र सरकार के उस अध्यादेश पर भी सवाल उठाए, जिसमें 12 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ दुष्कर्म करने वालों के खिलाफ मौत की सजा का प्रावधान किया गया है. उन्होंने कहा, रेप, रेप होता है. फिर ऐसे मामलों में दोषियों को पीडि़ता की उम्र के हिसाब से सजा क्यों.

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