किसान आंदोलन: हाई अलर्ट पर मप्र, 1 से 10 जून तक पुलिसकर्मियों की छुट्टी पर रोक

publiclive.co.in[Edited by विजय दुबे ]

भोपाल: मध्‍य प्रदेश के मंदसौर में पिछले साल छह जून को हुए किसान आंदोलन में नीमच मंदसौर जिले के 6 किसान मारे गए थे. इसी के खि‍लाफ विरोध के रूप में किसानों ने 10 दिन का आंदोलन किया है. किसान आंदोलन को आगामी छह जून को एक साल पूरा हो जाएगा और इसकी बरसी मनाने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी पहुंचेंगे. इस आंदोलन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्र में दूध सब्जियां, फल आदि बेचने के लिए किसान नहीं आएंगे. किसान आंदोलन के ऐलान के बाद मध्यप्रदेश सरकार पूरी तरह से अलर्ट हो चुकी है.

आंदोलित किसानों की मांग
55 साल की उम्र से ज्यादा के किसानों को 7वें वेतन आयोग के मुताबिक पेंशन (करीब 18 हजार रुपये प्रति माह) देने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में किसान संगठनों के एक धड़े ने गांव बंद का ऐलान किया है. इसी के साथ संपूर्ण कर्ज़माफी, किसानों को लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य, फल और सब्जियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग की जा रही है.

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ऐसी है पुलिस की तैयारी
कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए चिन्हित 35 जिलों को 10 हजार लाठियों के साथ हेलमेट, चेस्टगार्ड और 100 चार पहिया पुलिस वाहन दिए गए हैं. इंदौर, राजगढ़ में 8-8, मुरैना में 7, भोपाल, दतिया में 6-6, शिवपुरी, गुना, सतना में 5-5 गाड़ियां दी गईं. एसएएफ की 89 कंपनियां, 5000 नव आरक्षकों के साथ 15 हजार अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं तो स्थानीय स्तर पर थानों और पुलिस लाइन के फोर्स ने मोर्चा संभाला है. इंटेलिजेंस और लोकल पुलिस की किसान नेताओं पर नजर है. किसान नेताओं की जिलों में ‘मैन टू मैन” मार्किंग की जा रही है. इसके अलावा आंदोलन के स्थिति के अनुरूप इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी लगा दी गई है.

3 दिन बाद हिंसक हो सकता है आंदोलन
3 दिन के बाद किसान आंदोलन में हिंसा होने का इंटेलिजेंस को इनपुट मिला है. राहुल गांधी के साथ हार्दिक पटेल भी 6 जून को मंदसौर में रहेंगे. इंटेलिजेंस आईजी मकरंद देउस्कर ने कहा कि जैसे-जैसे आंदोलन आगे बढ़ता है वैसे-वैसे स्थितियां बदलेंगी. हाईवे से सटे हुए गांव के किसान अचानक एकजुट होकर कर उग्र प्रदर्शन सकते हैं. आईजी ने आगे कहा प्रदेश में किसान आंदोलन को लेकर 11 किसान संगठन को चिन्हित किया गया है. सभी संगठनों ने पुलिस से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने की बात कही है.

मालवा सहित भोपाल-महाकौशल ज्यादा संवेदनशील
पुलिस मुख्यालय के सूत्र बताते हैं कि उज्जैन संभाग के सभी जिलों को संवेदनशील माना गया है. वहीं, इंदौर में आलीराजपुर, झाबुआ और बड़वानी जैसे जिलों को छोड़कर दूसरे जिलों में आंदोलन के तहत किसानों की सक्रियता रहेगी. इस बार भोपाल और इसके आसपास के होशंगाबाद, हरदा, राजगढ़, रायसेन, सीहोर इस दृष्टि से संवेदनशील जिले माने जा रहे हैं.

ये हिस्से भी रहेंगे प्रभावित
महाकौशल में जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट का कुछ हिस्सा आंदोलन से प्रभावित रहेगा. ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में भी श्योपुर और मुरैना को पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट में किसान आंदोलन की दृष्टि से संवेदनशील माना गया है.

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