पाकिस्तान नहीं बाज आया अपनी हरकत से जम्मू के अखनूर सेक्टर में पाकिस्तान की फायरिंग, BSF के 2 जवान शहीद

publiclive.co.in [Edited by रवि यादव ]

श्रीनगर: पाकिस्तान की गोलीबारी में रविवार (3 जून) को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के दो जवान शहीद हो गए. देर रात करीब 1 बजकर 15 मिनट पर पाकिस्तान की ओर से जम्मू के अखनूर सेक्टर में सीमा की बाहरी चौकी पर बिना उकसावे के फायरिंग की गई, जिसमें बीएसएफ के दो जवान एएसआई एस.एन. यादव और कॉन्स्टेबल वी.के. पांडे गंभीर रूप से जख्मी हो गए. दोनों जवानों को तुंरत ही मेडिकल सुविधा मुहैया कराई गई, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी.

दूसरी सीमा चौकियों पर से सेना ने पाकिस्तान की ओर से की जा रही फायरिंग का करारा जवाब दिया. भारतीय सेना ने तुरंत ही मोर्चा संभालते हुए 51 एमएम मोर्टार और एमएमजी से पाकिस्तानी पोस्ट नुरुद्दीन पर जवाबी हमला किया. सीमा की बाहरी चौकी से जुड़े अन्य इलाकों से भी गोलीबारी की आवाजें आ रही हैं.

बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘पाकिस्तान ने 2003 के समझौते का ‘अक्षरशः’ पालन करने पर सहमत होने के बावजूद जम्मू कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया. आज सीमापर से हुई गोलीबारी में दो जवानों की मौत हो गई.’

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Two BSF personnel killed in cross-border firing by Pakistan in #JammuAndKashmir’s Akhnoor. More details awaited.

भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों (डीजीएमओ) ने बीते 29 मई को हॉटलाइन पर बातचीत के दौरान जम्मू कश्मीर में सीमा पार से गोलीबारी रोकने के लिए 2003 के संघर्षविराम समझौते का अक्षरश: पालन करने पर सहमति जतायी थी, लेकिन बावजूद इसके पाकिस्तान की ओर से रह-रहकर गोलीबारी की घटनाएं लगातार जारी है. नई दिल्ली में रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस साल 29 मई तक संघर्षविराम उल्लंघन की कुल 908 घटनाएं हुईं जबकि पिछले साल 860 घटनाएं हुई थीं.

भारत के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान और पाकिस्तान के मेजर जनरल साहिर शमशाद मिर्जा ने जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हालात की समीक्षा की थी और उसके बाद दोनों पक्षों ने 15 साल पुराने संघर्ष विराम समझौते को पूरी तरह लागू करने पर सहमति जताई थी. विशेष हॉटलाइन संपर्क की पहल पाकिस्तानी डीजीएमओ ने की. मई माह के मध्य में लगातार नौ दिन पाकिस्तानी पक्ष की ओर से भारी गोलाबारी के चलते सीमा के समीप रहने वाले निवासियों को अपने आशियानों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की शरण लेनी पड़ी थी.

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