क्‍या एमएम कलबुर्गी के हत्‍यारों में से एक था गौरी लंकेश हत्‍याकांड का आरोपी? SIT को शक

publiclive.co.in [ Edited By रवि यादव ]

नई दिल्‍ली : वरिष्ठ कन्नड़ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या के मामले में जांच का सामना कर रहे पुणे के 37 वर्षीय अमोल काले के तार कर्नाटक के तर्कवादी और प्रसिद्ध लेखक एमएम कलबुर्गी की हत्या से जुड़ते दिख रहे हैं. पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह व्‍यक्ति कथित रूप से उन दो लोगों में से एक था, जो धारवाड़ में एमएम कलबुर्गी की हत्‍या के वक्‍त उनके घर पर आए थे. कलबुर्गी की 30 अगस्त 2015 को उनके आवास पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

टाइम्‍स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के अनुसार, दो अज्ञात लोग कलबुर्गी के घर गए थे, जहां पहले उन्‍होंने कलबुर्गी और उनकी पत्‍नी उमादेवी से बातचीत की. उमादेवी घर के अंदर चली गई थीं, क्‍योंकि उन्‍हें लगा कि वे दोनों छात्र हैं. इसके बाद उनमें से एक ने कलबुर्गी को गोली मार दी थी. इन दोनों अज्ञात लोगों में से एक के अमोल काले होने का संदेह है, जिससे अब गौरी लंकेश की हत्या के मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा पूछताछ की जा रही है.

एसआईटी के सूत्रों ने अखबार को बताया, “कलबुर्गी के परिवार के एक करीबी सदस्‍य ने काले की पहचान की है. हम इस दावे की पुष्टि के लिए और सबूत जुटा रहे हैं. हम जल्द ही आपराधिक जांच विभाग से संपर्क करेंगे, जिसने कलबुर्गी की हत्या की प्रारंभिक जांच की थी.” काले एक प्रोपर्टी डीलर है, जोहिक पुणे में अपनी मां और पत्‍नी के साथ रहता है. काले, मनोहर यादव (विजयपुरा से), अमित देगवेकर (महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग से) और मंगलुरू के सुजीत कुमार, उर्फ प्रवीण को पहली बार मैसूर के तर्कवादी केएस भगवान की हत्‍या के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था. एसआईटी ने गौरी लंकेश हत्‍याकांड से तार जुड़ने के बाद इन्‍हें हिरासत में लिया था.

एसआईटी के सूत्रों के मुताबिक, ‘काले के साथी निहाल उर्फ दादा, जो अभी फरार है, का गौरी लंकेश हत्‍याकांड में मुख्‍य भूमिका निभाई जाने का संदेह है.’ जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, ‘वह दुबले-पतले शरीर वाला व्‍यक्ति है, जोकि अपने माथे पर लंबा तिलक लगाता है. वह ज्‍यादातर कुर्ता-पायजामा पहनता है और उसकी घनी दाढ़ी है. उसे पकड़ने के लिए हमने व्‍यापक स्‍तर पर अभियान चलाया हुआ है.’

काले से बरामद हुई एक डायरी में कर्नाटक के छह विचारकों और लेखकों के नाम हैं. एसआईटी को संदेह है कि दक्षिणपंथी विचारधारकों द्वारा इन्‍हें निशाना बनाया गया. ये नाम हैं गिरीश कर्नाड, गौरी लंकेश, चंद्रशेखर पाटिल, प्रो. एके भगवान, बारागुरु रामचंद्रप्पा और पूर्व मंत्री बीटी ललिता नायक. एसआईटी सूत्रों ने कहा, “डायरी में महाराष्ट्र के लेखक-विद्वानों के चार नाम भी आए थे.”

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