कर्नाटक : 8वीं पास जीटी देवगौड़ा बने उच्च शिक्षा मंत्री, कुमारस्वामी ने कहा, ‘इसमें कुछ गलत नहीं’

publiclive.co.in [ Edited By रवि यादव ]

बेंगलुरु : कर्नाटक के मंत्रिमंडल में पदों के बंटवारे को लेकर मंत्रियों में रूठने-मनाने का दौर चल रहा है. कभी कांग्रेस के मंत्री पदों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर देते हैं तो कभी जेडीएस के मंत्री. ताजा मामला शिक्षा मंत्री की शिक्षा को लेकर है. मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने जेडीएस के वरिष्ठ नेता जीटी देवगौड़ा के उच्च शिक्षा मंत्री बनाया है. हालांकि अपने पद को लेकर देवगौड़ा ने नाराजगी जाहिर कर दी है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि मुख्यमंत्री ने 8वीं पास नेता और उच्च शिक्षा मंत्री बनाया है. बता दें कि चामुंडेश्वरी सीट से पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को हराने वाले जीटी देवगौड़ा ने महज 8वीं तक ही तालीम हासिल की है.

हालांकि मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इस पर सफाई दी है कि किसी नेता की तालीम से उनके विभागों से कोई लेना-देना नहीं होता है. उनका अनुभव ही काम करता है. उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा, ‘मैंने क्या पढ़ाई की? मैं कर्नाटक का मुख्यमंत्री हूं.’ उन्होंने यहां कहा, ‘क्या मुझे वित्त मंत्रालय दिया जाना चाहिए? कुछ मंत्रालयों की मांग होगी लेकिन कुछ निर्णय पार्टी के अंदर होते हैं.’ उन्होंने कहा कि पहले मंत्री बनने और फिर कोई विशेष विभाग मांगने की बात सामान्य है.

कुमारस्वामी ने कहा, ‘कुछ लोगों को किसी खास विभाग में काम करने की इच्छा होती है लेकिन हर विभाग प्रभावी रूप से काम करने का अवसर होता है. हमें प्रभावी तरीके से काम करना होगा.’ आठवीं कक्षा पास एक मंत्री को उच्च शिक्षा विभाग आवंटित किए जाने पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए उन्होंने यह बात कही.

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8वीं पास हैं जीटी देवगौड़ा
बताया जाता है कि कम शिक्षा होने के कारण जीटी देवगौड़ा यह मंत्रालय मिलने से नाराज हैं. पार्टी सूत्रों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को 12 मई को हुए विधानसभा चुनावों में मैसुरू से हराने वाले देवगौड़ा कोई बड़ा विभाग चाहते थे. उच्च शिक्षा विभाग मिलने पर जीटी देवगौड़ा ने कथित तौर पर कहा था, ‘क्या उच्च शिक्षा विभाग और लघु सिंचाई के अलावा कोई अन्य विभाग बेहतर काम करने के लिए है?’

सिद्धारमैया को हराया देवगौड़ा ने
जीटी देवगौड़ा 8वीं पास हैं और वर्तमान में वह राजनेता होने के साथ-साथ एक प्रगतिशील किसान भी हैं. देवगौड़ा 3 बार विधायक रह चुके हैं और सहकारिता मंत्री रह चुके हैं. इस बार उन्होंने चामुंडेश्वरी सीट से पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को हराया था. 1970 में उन्होंने को ऑपरेटिव सोसाइटी के सचिव पद से अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की थी.

2004 में उन्होंने हुनसुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी. इसी साल उन्होंने लोकसभा का चुनाव भी लड़ा लेकिन हार गए. 2007 में जीटी देवगौड़ा बीजेपी में शामिल हो गए थे, लेकिन बाद में 2013 में जेडीए में शामिल हो गए और चामुंडेश्वरी सीट पर विजय हासिल की.

सीएस पुत्ताराजू भी हुए नाराज
देवगौड़ा के अलावा सीएस पुत्ताराजू भी अपने लघु सिंचाई विभाग से नाराज बताए जा रहे हैं. पुत्ताराजू ने लोकसभा सीट छोड़कर मेलूकोटे से चुनाव लड़ा और वहां से जीत हासिल की. उन्हें परिवहन सहित महत्वर्पूण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद थी. लेकिन परिवहन मंत्रालय जेडीएस सुप्रीमो एचडी देवगौड़ा के रिश्तेदार डीसी तमन्ना को दिया गया है.

बता दें कि कुमास्वामी ने शुक्रवार को मंत्रालयों का बंटवारा किया था. मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने वित्त और बिजली जैसे अहम विभाग भी अपने पास रख लिए, जबकि गृहमंत्रालय कांग्रेस कोटे से उपमुख्यमंत्री बने जी. परमेश्वरा को दिया गया है. बीएसपी के एकमात्र विधायक एन महेश को प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री बनाया गया है.

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कांग्रेस में भी रार
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को कर्नाटक के असंतुष्ट पार्टी विधायकों से मुलाकात की, हालांकि इस मुलाकात कोई समाधान नहीं निकल सका. मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज बताए जा रहे एमबी पाटिल के नेतृत्व में पार्टी के कई विधायकों की गांधी के साथ बैठक हुई. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव तथा राज्य के मंत्री कृष्णा बी. गौड़ा भी इस बैठक में उपस्थित थे.

मुलाकात के बाद पाटिल ने कहा कहा कि कैबिनेट विस्तार के बाद से नाराज चल रहे 15-20 विधायकों से चर्चा के बाद अगले कदम के बारे में फैसला किया जाएगा. पाटिल ने कहा, ‘मैंने राहुल गांधी के साथ अपने विचार साझा किए और राज्य में हालात के बारे में बताया. मैं कुछ मांग नहीं रहा हूं.’ उन्होंने यह भी कहा कि वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की दौड़ में भी नहीं हैं.
कृष्णा बी. गौड़ा कि हम मतभेद दूर करने के प्रयास कर रहे हैं. अभी बातचीत चल रही है. अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है.

उधर, कैबिनेट मंत्री डीके शिवकुमार का कहना है, “जाहिर है कि वरिष्ठ नेता दुखी हैं. कांग्रेस पार्टी बचे हुए विभागों के लिए सभी विकल्प खोल रखे हैं और जल्द ही इन्हें भरा जाएगा. मुझे पार्टी हाईकमान पर पूरा भरोसा है. हम पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच आत्मविश्वास बढ़ाएंगे.”

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