मोदी सरकार का ब्यूरोक्रेसी में बड़ा बदलाव, प्राइवेट नौकरी करने वाले भी बन सकेंगे ज्वॉइंट सेक्रेटरी

publiclive.co.in [ Edited By रवि यादव ]

नई दिल्ली: केंद्र सरकार की ओर से 10 मंत्रालयों में ज्वॉइंट सेक्रेटरी के लिए वैकेंसी निकाल गई है, जिसे लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े कर दिए हैं. दरअसल, सरकार ने ब्यूरोक्रेसी में लैटरल एंट्री की शुरुआत कर दी है, यानी, ब्यूरोक्रेसी का हिस्सा बनने के लिए UPSC की परीक्षा पास करने की अनिवार्यता नहीं होगी. प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी भी मंत्रालयों में ज्वाइंट सेक्रेटरी बन सकते हैं. सरकार की ओर से तर्क दिया गया है कि इससे मंत्रालय देश के ज्यादा अनुभवी लोगों का लाभ ले पाएगा.

विज्ञापन के मुताबिक लैटरल एंट्री के तहत होने वाली ज्वाइंट सेक्रेटरी का कार्यकाल तीन साल का होगा, अगर कामकाज संतोषजनक रहता है तो उनके कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाया जा सकेगा. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने पूरे मामले पर कहा कि यह सरकार की अच्छी पहल है. साथ ही स्पष्ट है कि हम सबसे योग्य लोगों को मंत्रालय में लाना चाहते हैं. वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, ‘ऐसे नहीं होता है, फैसला ले लिया और सुबह में पेपर में विज्ञापन दे दिया. इनको सरकार चलाना नहीं आता है.’

डीओपीटी की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि ज्वॉइंट सेक्रेटरी बनने के लिए न्यूनतम उम्र 40 साल होना चाहिए. हालांकि अधिकतम उम्र की सीमा तय नहीं की गई है. कार्यकाल तीन साल का होगा, लेकिन कामकाज संतोषजनक रहने वाले कार्यकाल पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है. प्राइवेट नौकरी से सीधे इस पद पर नियुक्त होने वाले लोगों को ज्वॅाइंट सेक्रेटरी वाली सारी सुविधाएं और वेतन मिलेंगे.

मालूम हो कि किसी भी किसी भी मंत्रालय या विभाग के जॉइंट सेक्रटरी के पास ही नीतिगत फैसले लेने और उसमें बदलाव करने का अधिकार होता है. विज्ञापन के मुताबिक इस पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का चयन इंटरव्यू के आधार पर होगा. कैबिनेट सेक्रटरी के नेतृत्व में बनने वाली समिति उम्मीदवार की नियुक्ति पर मुहर लगाएगी.

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