अटल बिहारी वाजपेयी किसी दल के नहीं, बल्कि पूरे देश के नेता थे

publiclive.co.in [ Edited By रवि यादव ]

छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ये वो कविता है… जिसमें बड़प्पन है… संकल्प है… प्रेरणा है… उदारता है… और देश को जोड़कर रखने की भावना है . भारत रत्न.. अटल बिहारी वाजपेयी 93 वर्ष के हो गये हैं . पिछले कई वर्षों से वो अस्वस्थ हैं लेकिन ये देश का सौभाग्य है कि 93 वर्ष की उम्र में भी वो हमारे बीच मौजूद हैं .

आज सुबह 11 बजे अटल बिहारी वाजपेयी को AIIMS में भर्ती करवाया गया . कहा जा रहा है कि Routine check up के लिए उनको AIIMS में भर्ती करवाया गया है . 18 Doctors की एक टीम अटल बिहारी वाजपेयी के स्वास्थ्य की जांच कर रही है . शाम 4 बजे के करीब AIIMS ने उनका एक मेडिकल बुलेटिन जारी किया . जिसमें उनकी हालत को स्थिर बताया गया है . अब कल सुबह 9 बजे AIIMS अटल जी का एक और मेडिकल बुलेटिन जारी करेगा…

सूत्रों का कहना है कि डॉक्टर कोई भी Risk नहीं लेना चाहते हैं इसीलिए हर तरह से अटल जी की जांच की जा रही है . अगर सब कुछ ठीक रहा तो कल उन्हें डिस्चार्ज किया जा सकता है .प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अटल बिहारी वाजपेयी की सेहत का हाल जानने के लिए आज AIIMS गये थे. नरेंद्र मोदी करीब 50 मिनट तक AIIMS में रहे . वहां उन्होंने अटल जी के परिवार के सदस्यों और डॉक्टर्स से बातचीत की . बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी अटल बिहारी वाजपेयी का हाल जानने के लिए AIIMS पहुंचे . केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड़्डा ने भी AIIMS का दौरा किया . बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी भी अटल बिहारी वाजपेयी का हाल जानने AIIMS गये.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी AIIMS जाकर अटल जी का हाल जाना. इसके अलावा कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी भी अटल जी को देखने AIIMS गये थे . अटल जी के भाषण और कविताएं आज भी पूरी दुनिया में गूंज रही हैं लेकिन वो खुद खामोश हैं . उनकी ये चुप्पी… उनके चाहने वालों को बहुत चुभती है . ये समय का फेर है… कि देश के सबसे बड़े वक्ता… जिनकी हाज़िर जवाबी की मिसालें दी जाती हैं . जिनका हर शब्द.. देश की धरोहर है . आज कुछ भी बोलने में असमर्थ हैं . लेकिन उनका जीवन और चरित्र आज भी देश को प्रेरणा दे रहा है .

अटल बिहारी वाजपेयी के बहुत सारे गुण हैं जिनसे आज की युवा पीढ़ी बहुत कुछ सीख सकती है. अटल बिहारी वाजपेयी.. भारत की राजनीति को एक नए दौर में ले गए थे. उन्होंने 20 से ज्यादा पार्टियों का गठबंधन बनाकर सरकार को बखूबी चलाकर दिखाया था. सबको साथ लेकर चलने का ये गुण Management के छात्रों के काम आ सकता है. उन्होंने पूरी दुनिया को ये बताया कि सिद्धांतों के आधार पर गठबंधन की राजनीति कैसे की जाती है..

अटल बिहारी वाजपेयी 50 से ज्यादा वर्षों तक राजनीति में रहे . लेकिन उन पर कभी कोई दाग नहीं लगा . ये बहुत बड़ी बात है . देश के युवा नेताओं को अटल जी से प्रेरणा लेनी चाहिए . अटल जी जब विपक्ष में रहे तो सरकार ने उन्हें बहुत सम्मान दिया और जब वो सरकार में रहे तो विपक्ष ने उन्हें बहुत सम्मान दिया . वो किसी दल के नहीं बल्कि पूरे देश के नेता थे . और ये बात समय-समय पर साबित होती रही . वर्ष 1993 में Geneva में मानवाधिकार सम्मेलन का आयोजन किया गया . तब पी वी नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री थे . और अटल बिहारी वाजपेयी विपक्ष में थे . लेकिन संयुक्त राष्ट्र संघ में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए पी वी नरसिम्हा राव ने अटल विहारी वाजपेयी को भेजा था. पूरी दुनिया इस फैसले से हैरान थी .

वर्ष 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार बनी और अटल जी विदेश मंत्री बने . तब उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण दिया था . ये पहला मौका था जब संयुक्त राष्ट्र में पहली बार हिंदी में भाषण दिया गया था. पहली बार इतने बड़े मंच पर हिंदी से दुनिया का परिचय हुआ . वर्ष 1957 में अटल जी पहली बार संसद में पहुंचे थे . तब पंडित जवाहर लाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे. ऐसा कहा जाता है कि अटल जी की भाषण शैली से जवाहर लाल नेहरू इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने कहा था कि ये नवयुवक कभी ना कभी देश का प्रधानमंत्री ज़रूर बनेगा . और उनकी ये भविष्यवाणी सच साबित हुई .

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