भय्यूजी महाराज: बिस्तर छोड़ने से लेकर पिस्तौल का ट्रिगर दबाने तक….पढ़ें हर क्षण की कहानी

publiclive.co.in[Edited by विजय दुबे ]

नई दिल्ली: दुनिया भर में लोगों की परेशानी और समस्याओं का निदान करने की कोशिश करने वाले आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने सुसाइड कर लिया है. इस सुसाइड के बाद हरेक के जेहन में बस एक ही सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वह कौन सी वजह थी, जिसके चलते आध्यात्मिक गुरु डिप्रेशन में चले गए थे. इस सवाल का जवाब तो पुलिस जांच रिपेार्ट सामने आने के बाद ही साफ हो पाएगा, लेकिन हम आपको सुसाइड वाले दिन की उनकी दिनचर्या के बारे में बता रहे हैं. इंदौर के स्थानीय अखबारों से बातचीत में भय्यूजी महाराज की पत्नी और डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने बताया कि आखिरी पलों में भय्यूजी महाराज ने क्या किया, क्या खाया, क्या बातें की, कैसा उनका स्वभाव रहा आदि.

रोजाना की तरह तड़के बिस्तर से उठे थे भय्यूजी
डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने बताया कि मंगलवार को भय्यूजी महाराज इंदौर के सिल्वर स्प्रिंग्स स्थित घर पर थे. पत्नी डॉ. आयुषी ने बताया, ‘मंगलवार को हर दिन की तरह भय्यूजी महाराज रोजाना की तरह तड़के करीब पांच बजे जग गए थे. उन्होंने सुबह में योग ध्यान भी किया था.’ उन्होंने बताया कि नहाने के बाद हल्का नाश्ता किया उसी वक्त खाने में कटहल की सब्जी खाने की इच्छा जताई. इसके बाद आयुषी ने मार्केट से कटहल की सब्जी मंगवाकर पकाया. खाना तैयार कर वह कॉलेज चली गईं. जाते-जाते उन्होंने भय्यूजी महाराज से कहा कि कटहल की सब्जी बन गई है, टाइम से लंच कर लें.

कॉलेज से लौटने के बाद डॉ. आयुषी ने पहले बच्ची को खाना खिलाया. इसके बाद मैंने नौकरों से पूछा- गुरुजी कहां हैं. नौकर बोले- किसी कमरे में हैं. आयुषी ने कई कमरों में गईं, लेकिन भय्यूजी महाराज नहीं मिले. बाथरूम तक में जाकर देख लिया. फिर ज्यादातर बंद रहने वाले एक कमरे में जाकर देखा. दरवाजा अंदर से बंद था. खटखटाया. कोई हलचल नहीं. मैंने जोर से आवाज लगाकर नौकरों को बुलाया. नौकर दौड़ते हुए आए. इसके बाद दरवाजा तोड़ा गया, तो भय्यूजी महाराज पड़े दिखे. चारों तरफ खून फैला हुआ था. आनन-फानन में अस्पताल पहुंचा गया, जहां डॉक्टरों मृत घोषित कर दिया.

बेटी के कुहू के कमरे की हालत को देखकर नाराज हुए थे महाराज
पुलिस ने घर वालों और नौकरों से पूछताछ के बाद बताया कि मंगलवार को भय्यूजी महाराज नाश्ता करने के बाद बेटी कुहू के कमरे में गए. कमरा अस्त-व्यस्त था. तभी उन्होंने जोर से पत्नी आयुषी को आवाज लगाया और कमरे की हालत को लेकर नाराजगी जाहिर की. सामने से आयुषी ने भी झल्लाहट में दो-चार बातें कह दीं. हालांकि नौकरों ने बताया ये बातचीत ऐसी नहीं थी की जिसे लेकर सुसाइड जैसा कदम उठाया जाए.

तभी भय्यूजी महाराज ने नौकरों से कहा कि वह कुहू का कमरा व्यवस्थित कर दे. नौकर जब तक कमरे में रहे तब तक भय्यूजी महाराज वहां खड़े रहे. कमरा व्यवस्थित होने के बाद वे वहां से बाहर निकले. दरअसल, कुहू मंगलवार को ही पुणे से इंदौर आने वाली थी, इसी वजह से उसके कमरे को लेकर भय्यूजी महाराज गुस्सा हुए थे. इसके बाद दोपहर में दोबारा कुहू के कमरे में गए और वहीं सुसाइड कर लिया.

दो दिन पहले ही बेटी से मिलने पुणे जाने वाले थे भय्यूजी
घरवालों का कहना है कि सुसाइड से दो दिन पहले यानी 10 जून को भय्यूजी महाराज अपनी बेटी कुहू से मिलने के लिए पुणे जाने के लिए निकले थे. हालांकि वे बीच रास्ते से ही लौट आए. उसी दिन दोपहर में बापट चौराहा स्थित अपने आश्रम पहुंचे और सीधे अपने कक्ष में चले गए. कुछ करीबी लोगों से मिले, लेकिन भक्तों से नहीं मिले. शाम तक आश्रम में ही रहे. आश्रम से जुड़े लोगों की मानें तो महाराज कुछ उदास और परेशान थे.

सुसाइड से चार दिन पहले 8 जून को भय्यूजी महाराज ने रात में बायपास स्थित रेस्तरां आर-9 में पत्नी डॉ. आयुषी का जन्मदिन मनाया था. इस कार्यक्रम में बेटी कुहू को छोड़ आश्रम के सभी लोग और परिजन शामिल हुए थे.

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