गुमराह कर रहे इन इन नामचीन कंपनियों के इश्तिहार, एएससीआई ने लगाई फटकार

publiclive.co.in [ EDITED BY SIDDHARTH SINGH]

मुंबई : भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) ने अप्रैल में विभिन्न कंपनियों के 89 विज्ञापनों को गुमराह करने वाला करार दिया है. इनमें टाटा स्टील, यामाहा मोटर, शियोमी और हिमालय ड्रग कंपनी के विज्ञापन शामिल हैं. एएससीआई की उपभोक्ता शिकायत परिषद (सीसीसी) को माह के दौरान कुल 162 शिकायतें मिली थीं. विज्ञापन क्षेत्र के नियामक ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के 24, शिक्षा के 34, फूड एंड बेवरेजेज के 20, पर्सनल केयर के दो और अन्य श्रेणियों में नौ विज्ञापनों के खिलाफ शिकायत को उचित पाया.

निगरानी के लिए कुल 101 विज्ञापन चुने
एएससीआई द्वारा स्वत: निगरानी के लिए कुल 101 विज्ञापन चुने गए. इनमें से 68 विज्ञापनों को गुमराह करने वाला पाया गया. जिन विज्ञापनों को गुमराह करने वाला पाया गया उनमें 61 शिकायतें आम जनता या उद्योग सदस्यों की ओर से आई थी. 12 मामलों को अनौपचारिक तरीके से सुलझा लिया गया और विज्ञापनों को स्वैच्छिक रूप से वापस ले लिया गया. 21 विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतों को सीसीसी ने सही पाया.

यूथ इटर्निटी अंडर आई क्रीम का ऐड कर रहा गुमराह
हिमालय ड्रग कंपनी के यूथ इटर्निटी अंडर आई क्रीम के विज्ञापन को गुमराह करने वाला पाया गया. विज्ञापन में दावा किया गया है कि इससे क्रो फीट, झुर्रियां और फाइन लाइंस चार सप्ताह में घट जाएंगी. इसी तरह चीन की हैंडसेट कंपनी शियोमी के विज्ञापन को भी बढ़ा-चढ़ा कर दावा करने वाला पाया गया. विज्ञापन में तीन लाख इकाइयां तीन मिनट में बिकने का दावा किया गया है. नियामक ने कहा कि इस दावे के समर्थन में कंपनी ने कोई प्रमाण नहीं दिया.

प्‍लास्टिक के खिलाफ विज्ञापन पर टाटा पाइप्‍स को लताड़
कनफेक्शनरी कंपनी परफेटी वान मेले के चुपा चुप सॉर स्ट्राइप बाइट विज्ञापन में खतरनाक करतब दिखाए गए हैं. नियामक ने कहा कि नाबालिग भी ऐसा कर सकते हैं जिससे उनको खतरा हो सकता है. इसी तरह यामाहा मोटर और टाटा स्टील के टाटा पाइप्स के विज्ञापन के खिलाफ शिकायतों को भी सही पाया गया. टाटा पाइप्स के विज्ञापन में दावा किया गया है, ‘प्लास्टिक को न कहें’ और ‘प्लास्टिक के खिलाफ हाथ मिलाएं.’ एएससीआई का कहना है कि यह विज्ञापन उपभोक्ताओं को बिना किसी आधार के यह बता रहा है कि सभी प्रकार का प्लास्टिकारेक बुरा होता है और उसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए. नियामक ने कहा कि इसमें प्लास्टिक के मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है.

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