राहुल गांधी ने मैग्सेसे विजेता भरत वतवानी व सोनम वांगचुक को दी बधाई

publiclive.co.in [EDITED BY SIDDHARTH SINGH]

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को इस साल का प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे अवार्ड जीतने पर भरत वतवानी व सोनम वांगचुक को बधाई दी. राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘दो भारतीय भरत वतवानी, जिन्होंने सड़कों पर रहने वाले मानसिक रूप से बीमार लोगों की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया व लद्दाखी अन्वेषक सोनम वांगचुक प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे अवार्ड 2018 के प्राप्तकर्ता हैं. मैं दोनों को बधाई देता हूं और उनकी उपलब्धियों को सलाम करता हूं.’

राहुल गांधी की यह टिप्पणी वतवानी व वांगचुक को इस साल के रेमन मैग्सेसे अवार्ड के लिए चुने जाने के बाद आई है. यह अवार्ड चार अन्य लोगों को भी मिला है. अवार्ड के ट्रस्टी बोर्ड ने कहा कि भरत वतवानी को ‘भारत में मानसिक रूप से पीड़ित वंचित तबके के लोगों की मदद करने, अद्भुत साहस व करुणा के साथ उपचार करने और समाज से निकाले गए लोगों की मानवीय गरिमा को बहाल करने के लिए उनके स्थिर व उदार समर्पण के लिए’ यह सम्मान दिया है’.

गौरतलब है कि साल 1988 में वतवानी दंपत्ति ने श्रद्धा फाउंडेशन की स्थापना की थी. जो पिछले 30 सालों से मानसिक रूप से बीमार मरीजों की मदद करने का काम कर रही है. अब तक यह फाउंडेशन 7000 से भी अधिक लोगों को उनके परिवार से मिलवा चुकी है. अभी इस रिहैब सेंटर में 74 पुरुष और 50 महिलाएं हैं. यहां इनका इलाज होता है, खाना-पीना दिया जाता है और इनकी देखभाल की जाती है.

वहीं सोनम वांगचुक को शिक्षा के जरिए सामुदायिक प्रगति के लिए काम करने को लेकर सम्मानित किया गया है. सोनम वांगचुक बर्फ का रेगिस्तान कहे जाने वाले लद्दाख में बच्चों के लिए शिक्षा के बदलाव का बीड़ा उठाए हुए हैं. लद्दाख में सोनम वांगचुक ने अपने देस्तों के साथ मिलकर साल 1988 में एक अभियान शुरु किया था. जिसे स्टूडेंट एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख यानी सेकमॉल के नाम से जाना जाता है.

बता दें कि बॉलीवुड की फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ की प्रेरणा सोनम वांगचुक ही थे. उन्हें उत्तर भारत के दूरस्थ इलाकों में सीखने की प्रणाली में अपने विशिष्ट व्यवस्थित, सहयोगी और समुदाय संचालित सुधार के लिए मान्यता मिली. जिसने लद्दाखी युवाओं के जीवन में व्यापक तौर पर सुधार किया. एशिया का नोबेल पुरस्कार माने जाने वाले रेमन मैग्सेसे अवार्ड का यह 60वां साल है. यह अवार्ड एशिया के व्यक्तियों एवं संस्थाओं को अपने क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लेखनीय कार्य करने के लिए प्रदान किया जाता है.

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