Jio Institute कैसे बना ‘उत्‍कृष्‍ट संस्‍थान’? मंत्री ने लोकसभा में बताई वजह

puliclive.co.in [EDITED BY SIDDHARTH SINGH]

नई दिल्ली : मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार (30 जुलाई को) कहा कि रिलायंस समूह के प्रस्तावित जियो विश्वविद्यालय (Jio Institute) को उत्कृष्ट संस्थान से संबंधित आशय पत्र देने से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि यह निर्णय उच्च स्तरीय समिति ने लिया है. लोकसभा में प्रसून बनर्जी और सौगत राय के पूरक प्रश्नों के उत्तर में जावड़ेकर ने कहा कि जियो का उत्कृष्ट संस्थान से जुड़ा आशय पत्र ‘ग्रीनफील्ड’ श्रेणी के तहत जारी किया गया.

उच्च स्तरीय समिति ने किया फैसला
जावड़ेकर ने कहा कि यह फैसला उच्च स्तरीय समिति ने किया और इससे सरकार का कोई लेना-देना नहीं है. मंत्री ने कहा कि उत्कृष्ट संस्थानों के लिए कुल 114 आवेदन आए थे जिनमें 74 सरकारी संस्थानों के आवेदन थे. इसके अलावा 29 निजी संस्थानों ने आवेदन किया था और 11 प्रस्तावित संस्थानों से ‘ग्रीनफील्ड’ श्रेणी के तहत आवेदन मिले थे. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उत्कृष्ट संस्थानों की और भी सूची जारी की जाएगी. मंत्री ने यह भी कहा कि सिर्फ सरकारी संस्थानों को 1000 करोड़ रुपये दिए गए हैं और किसी भी निजी संस्थान को एक पैसा नहीं दिया जाएगा. जावड़ेकर ने एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि विदेश से प्रतिभावन भारतीय बड़ी संख्या में स्वदेश लौट रहे हैं.

कोई भी पीएम ऐसा करने से पहले सोचता: पनगढ़िया
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने जियो इंस्टीट्यूट, जो अभी अस्तित्‍व में ही नहीं है, को सरकार की तरफ से ‘उत्कृष्ट संस्थान’ का दर्जा देने पर पीएम नरेंद्र मोदी को ‘साहसिक राजनेता’ ठहराया था.

एक कार्यक्रम में पनगढ़िया ने कहा था कि मोदी सरकार द्वारा किये गये आर्थिक सुधारों के परिणामस्वरूप भारत अगले 15-20 साल में ‘तेज गति’ से विकास के लिए तैयार है. भारत के माहौल को देखते हुए कोई भी प्रधानमंत्री किसी ऐसी चीज के बारे में घोषणा करने से पहले दो-तीन बार सोचता है, जो अभी अस्तित्व में ही नहीं आई है क्योंकि इसके बाद प्रेस का दबाव झेलना होता है.

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