मूंछ रखने पर गुजरात में दलित-राजपूत भिड़े, पुलिस ने की यह कार्रवाई

publiclive.co.in [EDITED BVY SIDDHARTH SINGH]

अहमदाबाद : क्‍या आपने सुना है कि मूंछ रखने और निक्‍कर पहनने पर कोई ऐतराज करे और बात भिड़ंत तक पहुंच जाए. गुजरात में एक ऐसा ही मामला सामने आया है. अहमदाबाद के एक इलाके में कराडिया राजपूत (ओबीसी समुदाय) ने एक दलित युवक के निक्कर पहनने और मूंछ रखने पर कथित रूप से आपत्ति की. बात इतनी बढ़ी कि दोनों समुदायों के बीच झड़प हो गई. पुलिस उपाधीक्षक पीडी मानवर ने बताया कि मंगलवार रात को कविता गांव में दोनों समुदायों के बीच झड़प हुई. इसके बाद दोनों समुदायों के सदस्यों ने एक दूसरे के विरुद्ध बावला थाने में शिकायत दर्ज कराई है.

राजपूत समुदाय के 5 लोग हिरासत में
राजपूत समुदाय के 5 लोग पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए हैं. रमनभाई मकवाना ने शिकायत दर्ज कराई है कि जब उसके भतीजे विजय 31 जुलाई को एक दुकान पर गये थे तब 7 लोगों ने उस पर हमला कर दिया. राजपूत समुदाय से कथित रूप से संबद्ध इन लोगों ने निक्कर पहनने और मूंछ रखने पर विजय पर जातीय टिप्पणी की. बाद में कुछ राजपूत ट्रक से आए और उन्होंने मकवाना के भाई विनूभाई और उसके बेटे विजय एवं संजय पर हमला किया.

दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला करने का आरोप लगाया
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, गंभीर सिंह राठौड़ समेत कुछ राजपूतों पर भादसं एवं अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून की सबंधित धाराएं लगाई गई हैं. उधर, राठौड़ ने आरोप लगाया है कि विजय ने दूसरों के साथ मिलकर उन लोगों पर हमला किया. उसे दो दिन पहले एक प्राथमिक विद्यालय में दलित और राजपूत युवकों के बीच हुई कहासुनी को लेकर नाराजगी थी. पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों की रिपोर्ट लिख ली गई है. हम घटना की कड़ी जोड़ने में लगे हैं. जांच के बाद दो‍षियों पर सख्‍त कार्रवाई होगी.

भारत में हर 15 मिनट में एक दलित का होता है उत्‍पीड़न: NCRB
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक, 2007-2017 के बीच दलित उत्पीड़न के मामलों में 66 फीसदी का इजाफा हुआ है. इस दौरान रोजाना देश में छह दलित महिलाओं से दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए, जो 2007 की तुलना में दोगुना है. आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर 15 मिनट में दलितों के साथ आपराधिक घटनाएं हुईं. एनसीआरबी द्वारा जारी आंकड़े देश में दलितों की समाज में स्थिति और उनकी दशा की कहानी बयां करते हैं. आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 4 साल में दलित विरोधी हिंसा के मामलों में बहुत तेजी से वृद्धि हुई है. 2006 में दलितों के खिलाफ अपराधों के कुल 27,070 मामले सामने आए जो 2011 में बढ़कर 33,719 हो गए. वर्ष 2014 में अनुसूचित जाति के साथ अपराधों के 40,401 मामले, 2015 में 38,670 मामले और 2016 में 40,801 मामले दर्ज किए गए.

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